बसंत ऋतु
पांच तत्वों से निर्मित यह काया
इसे प्रकृति से प्रभावित होते हैं।
सृष्टि चलाए मांन होती ऋतुओं से
मुख्य तीन ऋतु होती हैं यहां पर।
ऊनपर जितना की बात करें तो
उप ऋतु भी तीन ही होती हैं।
ऋतुओं के आने जाने पर एक
नई ऋतु यू उप ऋतुआ जाती है।
जिसको हम अपने जीवन में
सहायक या उप ऋतु कहते हैं।
तन मन को जो मेरे भाती है
वही बसंत ऋतु कहलाती है।
जो कार्य क्षमता को बढ़ाती है
मन मौसम को अनुकूल बनाती।
दुगनी क्षमता काया को दे जाती
वही बसंत रितु कहलाती है।
खेतों में हरियाली लाती है
पीत वसन से सज धज जाती
अन्नदाता को खुशी दे जाती
वही बसंत रितु कहलाती है।
आध्यात्मिक प्रभाव बढ़ती है
पौराणिक गाथा सुनाती है।
उत्साह आनंद से भर देती
वही बसंत रितु कहलाती है। ।
- सुख मंगल सिंह
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