एक छोटे से गाँव में एक गरीब किसान रहता था। उसका नाम था रामू। रामू के पास एक छोटा सा खेत था, जिसमें वह अपने परिवार के लिए अनाज उगाता था। लेकिन रामू का खेत बहुत ही बंजर था, और वह कभी भी अच्छी फसल नहीं ले पाता था।
एक दिन, रामू के गाँव में एक संत आए। रामू ने उनसे अपने खेत की समस्या बताई। संत ने रामू को एक छोटा सा पौधा दिया और कहा, "इस पौधे को अपने खेत में लगाओ, और इसकी देखभाल करो। यह पौधा तुम्हारे खेत को उपजाऊ बना देगा।"
रामू ने संत की बात मान ली और पौधे को अपने खेत में लगा दिया। उसने पौधे की देखभाल की, और जल्द ही पौधा बड़ा हो गया। रामू ने देखा कि उसके खेत में अब अच्छी फसल हो रही है, और उसका परिवार खुशहाल हो गया।
रामू ने संत को धन्यवाद दिया और पूछा, "संत जी, इस पौधे में ऐसा क्या है जो मेरे खेत को उपजाऊ बना दिया?"
संत ने मुस्कराकर कहा, "इस पौधे का नाम है 'प्रेम'। यह पौधा तुम्हारे खेत को नहीं, बल्कि तुम्हारे दिल को उपजाऊ बना दिया है। जब तुमने इस पौधे की देखभाल की, तो तुम्हारे दिल में भी प्रेम और शांति का फूल खिल गया। यही प्रेम और शांति तुम्हारे खेत को उपजाऊ बना दिया।"
- सुख मंगल सिंह
वरिष्ठ साहित्यकार कवि एवं लेखक
वाराणसी वासी अवध निवासी अंबेडकर नगर उत्तर प्रदेश
Sukhmangal Singh
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