"बड़ा हुआ तो क्या हुआ जैसे पेड़ खजूर पंछी को छाया नहीं फल लागे अति दूर" - यह एक प्रसिद्ध कहावत है जो हमें यह सिखाती है कि बड़ा होने का मतलब यह नहीं है कि आप दूसरों के लिए कुछ नहीं कर सकते।
इस कहावत में पेड़ खजूर का उदाहरण दिया गया है। पेड़ खजूर बड़ा होता है, लेकिन वह पंछियों को छाया नहीं देता और उसके फल भी बहुत दूर होते हैं। इसी तरह, अगर हम बड़े हो जाते हैं और अपने परिवार, समाज और देश के लिए कुछ नहीं करते हैं, तो हमारा बड़ा होना बेकार है।
आज के समय में, यह कहावत हमें यह याद दिलाती है कि हमें अपने जीवन में दूसरों के लिए कुछ करना चाहिए। हमें अपने परिवार, समाज और देश के लिए योगदान देना चाहिए। हमें अपने ज्ञान, कौशल और अनुभव का उपयोग दूसरों की मदद करने के लिए करना चाहिए।
एक पेड़ खजूर की तरह, हमें भी अपने जीवन में फल देने चाहिए। हमें अपने आसपास के लोगों को छाया देनी चाहिए, उन्हें प्रेरित करना चाहिए और उन्हें आगे बढ़ने में मदद करनी चाहिए। हमें अपने जीवन में बदलाव लाने के लिए काम करना चाहिए और दूसरों के जीवन में भी बदलाव लाने में मदद करनी चाहिए।
इसलिए, आइए हम इस कहावत को अपने जीवन में उतारें और दूसरों के लिए कुछ करने का प्रयास करें। आइए हम अपने जीवन में फल देने वाले पेड़ बनें और दूसरों को छाया दें।
हम सच्चाई से मुंह मोड़ सकते हैं
लेकिन इसके परिणाम से मुंह नहीं मोड़ सकते
सच्चाई छुप सकती है, लेकिन नष्ट नहीं हो सकती
यह हमेशा सामने आती है, और हमें उसका सामना करना पड़ता है
हम झूठ बोल सकते हैं, लेकिन सच्चाई को नहीं हरा सकते
हम धोखा दे सकते हैं, लेकिन न्याय को नहीं हरा सकते
हम अपने आप को धोखा दे सकते हैं, लेकिन अपने अंतर्मन को नहीं हरा सकते
हम सच्चाई को दबा सकते हैं, लेकिन उसे नष्ट नहीं कर सकते
सच्चाई की शक्ति असीम है, वह हमेशा जीतती है
हम उसे दबा सकते हैं, लेकिन उसे हरा नहीं सकते
सच्चाई का सूर्य हमेशा उगता है, और अंधकार को दूर करता है
हम सच्चाई से मुंह मोड़ सकते हैं, लेकिन इसके परिणाम से मुंह नहीं मोड़ सकते हैं।।
- सुख मंगल सिंह
वाराणसी
Sukhmangal Singh
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