Swargvibha
Dr. Srimati Tara Singh
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"अपना मुल्क है प्यारा"

 
"अपना मुल्क है प्यारा"

करे जो शान का सदा

 उसे रहने नहीं देंगे। 

हमारा मुल्क है प्यारा 
जुल्म करने नहीं देंगे।।

चढ़े फांसी के फंदे पर 
वतन की आबरू बचाने में! 
रग रग में बहती थी लहू की धार 
चमन को सजाने में।।

हमारे इतिहास भारत का 
इसे मिटाने नहीं देंगे।
हमारा मुल्क है प्यारा 
जुल्म करने नहीं देंगे।।

दुश्मनों के लहू को बहा देंगे हम 
इस वतन के लिए सर कटा देंगे हम। 

तुझे जीने नहीं दगे
कोई गला कटने नहीं देंगे।
हमारा मुल्क है प्यारा 
जुल्म करने नहीं देंगे।।

तबाही लाख आ जाये 
अपना कम रुकने नहीं देना।
तिरंगा  शान भारत का 
कभी झुकने नहीं देंगे।।

रचनाकार: तेज बली अनपढ़,
 ग्राम: टकटक पुर, पोस्ट :भीकमपुर चकिया 
संकलन करता:-सुखमंगल सिंह, वाराणसी 

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