"अंबेडकर नगर जनपद का इतिहास, साहित्यकार एवं संत परंपरा"
सुनो कहानी एक जिले की, जिसका नाम है अंबेडकर नगर,
फैजाबाद की गोद से निकला, बना नया एक शहर।
29 सितंबर 1995 का, वो दिन था ऐतिहासिक,
मायावती सरकार ने रचा था, एक भूगोल पारंपरिक।
फैजाबाद से काटकर बना, ये नया जिला महान,
बाबा साहेब के नाम पर रखा, इसका गौरवशाली नाम।
पूर्व में बस्ती गोरखपुर, पश्चिम में अयोध्या धाम,
उत्तर में सरयू बहती, दक्षिण में गोमती का नाम।
अकबरपुर बना मुख्यालय, इसका हृदय स्थल,
टांडा, जलालपुर, आलापुर, भित्ती इसकी हलचल।
टांडा की टेरीकॉट नगरी, विश्व में है प्रसिद्ध,
हथकरघा उद्योग यहाँ का, करता सबको समृद्ध।
यहाँ की मिट्टी में बसी है, अवध की सभ्यता खास,
हिंदू मुस्लिम एकता का, यहाँ संगम है पास।
साहित्य की धरती है ये, सृजन का है आधार,
यहाँ जन्मे कई रचनाकार, जिनका बड़ा है प्यार।
आचार्य डॉ. भानुदत्त त्रिपाठी 'मधुरेश' जी का नाम,
जिनकी लेखनी से महकता, साहित्य का धाम।
राम यज्ञ शुक्ल, हौसला प्रसाद, विद्या सागर मान,
कई कवियों ने इस धरती को, दिया है नया मान।
शिवमूरत, श्री प्रकाश, और त्रिपाठी परिवार,
शब्दों से सींचा इस जिले को, करके बड़ा उपकार।
साधु-संतों की धरती है, तपोभूमि महान,
शिवबाबा धाम का डंका, बजता सकल जहान।
गोविंद साहब धाम जहाँ, कबीर पंथ का प्रकाश,
सतगुरु के ज्ञान से होता, अंधकार का नाश।
बाबा कपिल मुनि, लोरम बाबा, सिद्ध संत अनेक,
टांडा के सूफी संतों ने, दिया प्रेम का विवेक।
मठ, मंदिर, मजारें यहाँ, देती समता संदेश,
सर्व धर्म समभाव का, गूँजता यहाँ परिवेश।
सरयू तट के किनारे, होते संतों के मेले,
ज्ञान ध्यान की धारा में, लगते अद्भुत झमेले।
अवधी बोली मीठी यहाँ, जैसे मिश्री की खान,
भोजपुरी का रंग भी घुला, रखे सबका मान।
धान, गेहूँ, गन्ना उपजे, धरती है धनवान,
मेहनतकश किसान यहाँ के, भारत की हैं शान।
सुख मंगल कहता गर्व से, सुनो मेरे मीत,
अंबेडकर नगर है गौरव, अवध का सुंदर गीत।।
"अंबेडकर नगर के वर्तमान साहित्य रत्नों को समर्पित रचना"
धन्य है अंबेडकर नगर, धन्य है इसकी माटी,
जहाँ शब्दों के दीप जले, और साहित्य की है थाती।
एक नहीं कई रत्न यहाँ, साहित्य के अनमोल,
जिनकी लेखनी से महके, जनपद का हर कोना-कोल।
याद करो दान बहादुर सिंह 'सूंड' कवि महान,
जिनकी कविता में बसता था, जनपद का स्वाभिमान।
सरल सहज व्यक्तित्व था, वाणी में था ओज,
कविता पढ़ते तो लगता, जैसे ज्ञान का है भोज।
उनकी ही परम्परा को, आगे बढ़ा रहे आज,
डॉ. सुख मंगल सिंह देखो, कर रहे हैं कविता पर नाज।
अकबरपुर की धरती से, जिनका है उद्गार,
मंचों पर जब आते हैं, होता है जय-जयकार।
शिक्षा और साहित्य का, संगम जिनका काम,
बच्चों को ज्ञान देते, और कविता को प्रणाम।
डॉ. तारकेश्वर मिश्र जी भी, इसी धरती के लाल,
जिनके शब्दों में बसती है, अवधी की खुशहाल।
गद्य-पद्य दोनों में जिनकी, लेखनी है महान,
साहित्य साधना में रत, रखते ऊँचा मान।
तीनों नाम नहीं केवल, हैं जनपद की शान,
इनके ही साहित्य से, बनता जिले का नाम।
दान बहादुर 'सूंड' ने जो, बीज दिया था बोय,
सुख मंगल, तारकेश्वर ने, उसे दिया है संजोय।
आज भी मंचों पर गूँजती, उनकी कविता धारा,
अंबेडकर नगर का साहित्य, लगता सबसे प्यारा।
एक मंच पर दिखते हैं, जब ये सभी महान,
लगता है सरस्वती स्वयं, करती है गुणगान।
नमन है इन कलमकारों को, नमन है इनकी लेखनी,
जिनसे रोशन हो रही, अंबेडकर नगर की जीवनी।
सुख मंगल कहे विनय से, रहें अमर ये नाम,
अंबेडकर नगर के कवियों को, शत-शत करूँ प्रणाम।।
- सुख मंगल सिंह
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