"अभियान नवगीत "------------------------बांधे सर पे मस्त पगड़ियाराह कठिन हो,चलना साथीदुराचार ख़तम करने अबउतार चलो काँधे की गाँतीआन ,बान और शान हमारेअच्छे- सच्चे हैं वनवासीदिलों - दिलों को दर्द बतानेमहफिल - महफिल खड़ी उदासीआँखें भर - भर उठती हैंमां जब अपनी कहर सुनातीबांधे सर पे ................जोते - बोये ,कोड़े -सींचेधरती में अपना खून -पसीनाफसलें हरी भरी लहरायेंहर्षित हुआ कृषक का सीनासभी घरों में पेट को भरतेबेटे ,पोते, नतिनी -नातीबांधे सर पे..................घर- आँगन का नन्हा बच्चानाचे ,झूमे और इठलायेवहीं ,किसान का बेटा ,सीमा परहंसते - हंसते गोली खायेसंबंधों की स्मृतियों संगआँखें खुली -खुली रह जातींबांधे सर पे मस्त पगड़ियाकठिन राह पे चलना साथी |- सुखमंगल सिंह
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