Swargvibha
Dr. Srimati Tara Singh
Administrator

"अभियान नवगीत "

 
"अभियान नवगीत "
------------------------
बांधे सर पे मस्त पगड़िया 
राह कठिन हो,चलना साथी 
              दुराचार ख़तम करने अब 
              उतार चलो काँधे की गाँती 
 आन ,बान और शान हमारे 
 अच्छे- सच्चे हैं वनवासी 
 दिलों - दिलों को दर्द बताने 
महफिल - महफिल खड़ी उदासी 
             आँखें भर - भर उठती  हैं 
             मां जब अपनी कहर सुनाती
बांधे सर पे ................ 
             जोते - बोये ,कोड़े -सींचे 
             धरती में अपना खून -पसीना 
             फसलें हरी भरी लहरायें 
             हर्षित हुआ कृषक का सीना 
सभी घरों में पेट को भरते 
बेटे ,पोते, नतिनी -नाती 
बांधे सर पे..................
              घर- आँगन का नन्हा बच्चा 
              नाचे ,झूमे और इठलाये 
              वहीं ,किसान का बेटा ,सीमा पर 
              हंसते - हंसते  गोली खाये 
संबंधों की स्मृतियों संग 
आँखें खुली -खुली रह जातीं
बांधे सर पे मस्त पगड़िया 
कठिन राह पे चलना साथी | 
- सुखमंगल सिंह 

Powered by Froala Editor

LEAVE A REPLY
हर उत्सव के अवसर पर उपयुक्त रचनाएँ