आंधी !
प्रभंजन, आंधी की गर्जना
बिखेरती है पत्ते, फूल, और पत्थर
हवाओं की तांडव, धरती की गर्जना
बनाती है एक नया संसार
प्रभंजन, नाश की कहानी
बिखेरती है जीवन की कहानी
पत्ते झड़ते हैं, फूल खिलते हैं
जीवन की यात्रा में, नए पल आते हैं
प्रभंजन, आंधी की शक्ति
बिखेरती है जीवन की रक्ति
हवाओं की तांडव, धरती की गर्जना
बनाती है एक नया संसार
प्रभंजन, जीवन की गति
बिखेरती है जीवन की रक्ति
हवाओं की तांडव, धरती की गर्जना
बनाती है एक नया संसार
प्रभंजन, आंधी की गर्जना
बिखेरती है जीवन की कहानी
जीवन की यात्रा में, नए पल आते हैं
प्रभंजन, आंधी की गर्जना
प्रभंजन, नाश की कहानी
बिखेरती है जीवन की कहानी
पत्ते झड़ते हैं, फूल खिलते हैं
जीवन की यात्रा में, नए पल आते हैं।।
- सुख मंगल सिंह
वरिष्ठ साहित्यकार कवि एवं लेखक
वाराणसी
Sukhmangal Singh
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