Swargvibha
Dr. Srimati Tara Singh
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सच्चाई को अपनाओ

 

भाव भरा यह दर्पण है 

इसे ना समझना समर्पण है।

यह दोहा बहुत ही गहरा अर्थ रखता है। इसमें कहा गया है कि दर्पण हमारे चेहरे को दिखाता है, लेकिन हमें इसे समझना होगा कि यह सिर्फ हमारे बाहरी रूप को दिखाता है, न कि हमारे असली स्वरूप को।

इस दोहे में यह भी कहा गया है कि दर्पण को न समझना और उसके दिखाए हुए रूप को ही अपना असली रूप मान लेना एक तरह का समर्पण है, यानी अपने आप को उस रूप में समर्पित कर देना जो असली नहीं है।

इस दोहे से हमें यह शिक्षा मिलती है कि हमें अपने असली स्वरूप को समझना चाहिए और बाहरी दिखावे से ऊपर उठना चाहिए।

*दर्पण की सच्चाई*

दर्पण दिखाता है रूप तेरा,
बाहर का, भीतर का नहीं हकीकत कहता।
जीवन की सच्चाई को समझो,
बाहरी दिखावे में न फंसो।

दर्पण में दिखता है चेहरा तेरा,
लेकिन असली रूप तो आत्मा का है।
बाहर की सुंदरता क्षणिक है,
आंतरिक सुंदरता ही सच्ची है।

जीवन एक दर्पण है, जैसे हो वैसे दिखते हैं,
अच्छाई और बुराई दोनों का प्रतिबिंब दिखता है।
दर्पण की तरह सच्चाई को दिखाना,
हमारे हाथ में है, चुनना हमें है।

बाहरी दिखावे से ऊपर उठो,
आत्मा की गहराई में जाओ।
सच्चाई को पहचानो, उसे अपनाओ,
तभी तो जीवन की सच्चाई को जान पाओगे।

दर्पण की सच्चाई को समझो,
बाहरी रूप से ऊपर उठो।
आत्मा की सुंदरता को दिखाओ,
तभी तो जीवन सच्चा होगा।।
यह रचना हमें कई महत्वपूर्ण सबक सिखाती है:

1. *बाहरी दिखावे से ऊपर उठना*: रचना हमें सिखाती है कि बाहरी सुंदरता और दिखावा महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि आंतरिक सुंदरता और गुण महत्वपूर्ण हैं।

2. *आत्म-ज्ञान*: यह रचना आत्म-ज्ञान के महत्व पर प्रकाश डालती है, जिसमें हम अपने असली स्वरूप को समझते हैं और अपने दोषों और गुणों को पहचानते हैं।

3. *सच्चाई को अपनाना*: रचना हमें सच्चाई को अपनाने और उसे अपने जीवन में उतारने के लिए प्रेरित करती है, भले ही वह कठिन हो।

4. *आंतरिक विकास*: यह रचना हमें आंतरिक विकास पर ध्यान केंद्रित करने और अपने चरित्र को सुधारने के लिए प्रेरित करती है।

5. *जीवन की सच्चाई*: रचना हमें जीवन की सच्चाई को समझने और उसे स्वीकार करने के लिए प्रेरित करती है, जिसमें सुख-दुख, सफलता-असफलता दोनों शामिल हैं।

इन सबकों को अपने जीवन में अपनाकर, हम अपने जीवन को सकारात्मक दिशा में बदल सकते हैं और एक सार्थक जीवन जीने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।।
- सुख मंगल सिंह 
वरिष्ठ साहित्यकार कवि एवं लेखक 
वाराणसी वासी
 अवध निवासी 


Sukhmangal Singh

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