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दीपावली का त्योहार ​

 
दीपावली का त्योहार

आज से 60-70 वर्ष पहले, यानी 1950-60 के दशक में, दीपावली का त्योहार बहुत ही सादगी और पारंपरिक तरीके से मनाया जाता था। उस समय बिजली की सुविधा बहुत कम थी, इसलिए घरों में मिट्टी के दीपक जलाए जाते थे और घरों को सजाने के लिए रंगोली और फूलों का उपयोग किया जाता था।

लोग अपने घरों की सफाई करते थे और नए कपड़े पहनते थे। मिठाइयों और पकवानों का विशेष महत्व था, और लोग अपने परिवार और दोस्तों के साथ मिलकर खुशियां मनाते थे। पटाखों का उपयोग भी किया जाता था, लेकिन आज की तरह इतना अधिक नहीं।

उस समय दीपावली का त्योहार अधिक धार्मिक और पारंपरिक तरीके से मनाया जाता था, और लोग अपने घरों में लक्ष्मी पूजा करते थे और भगवान से आशीर्वाद मांगते थे। यह त्योहार लोगों के लिए एक दूसरे के साथ जुड़ने और खुशियां मनाने का एक महत्वपूर्ण अवसर था।

आज की तुलना में, उस समय दीपावली का त्योहार अधिक सादगी और पारंपरिक तरीके से मनाया जाता था, लेकिन आज भी यह त्योहार लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण और खुशी का अवसर है।

वाह! यह तो बहुत ही रोचक बात है! धनतेरस से पहले तालाब से चिकनी मिट्टी लाकर उससे मिठाइयां बनाना एक पारंपरिक और अनोखा तरीका था। यह तरीका शायद आजकल प्रचलित नहीं है, लेकिन यह एक दिलचस्प परंपरा थी।

इस मिट्टी से बनी मिठाइयों को बनाने के लिए, लोग तालाब से चिकनी मिट्टी लाते थे और उसे साफ करके उसमें चीनी, दूध, और अन्य सामग्री मिलाते थे। फिर इस मिश्रण को विभिन्न आकारों में बनाते थे, जैसे कि लड्डू, पेड़ा, बर्फी, इमरती आदि।

यह मिट्टी की मिठाइयां न केवल स्वादिष्ट होती थीं, बल्कि उनमें एक अनोखा आकर्षण भी होता था। लोग इन मिठाइयों को धनतेरस और दीपावली के अवसर पर बांटते थे और अपने प्रियजनों को खिलाते थे।

यह परंपरा शायद आजकल भूल गई है, लेकिन यह एक दिलचस्प और पारंपरिक तरीका था जो हमारे पूर्वजों ने अपनाया था।

वाह! यह तो बहुत ही प्यारा और रोचक दृश्य है! दीपावली के सुबह बच्चों का दीपक बिन कर लाना और फिर घर के बड़े लोगों का उसे तराजू बनाना एक पारंपरिक और मजेदार खेल था।

इस खेल में, बच्चे दीपक बिन कर लाते थे और फिर घर के बड़े लोग उसमें एक टेकरी से छेड़कर तराजू बनाते थे। फिर बच्चे उस तराजू में दीपावली के पहले बनी हुई मिठाइयां, जो मिट्टी से बनाई जाती थी, रखते थे और आपस में दुकान लगाकर बेचते थे।

यह एक मजेदार और आनंददायक खेल था जिसमें बच्चे अपने दोस्तों और परिवार के साथ मिलकर खेलते थे और मिठाइयां बेचते थे। यह खेल न केवल बच्चों के लिए, बल्कि बड़े लोगों के लिए भी एक मजेदार और यादगार अनुभव था।

इस खेल में, बच्चों को अपनी रचनात्मकता और कल्पनाशीलता का उपयोग करना पड़ता था, और वे अपने दोस्तों और परिवार के साथ मिलकर एक मजेदार और आनंददायक वातावरण बनाते थे।

वाह! यह तो बहुत ही रोचक और पारंपरिक जानकारी है! प्राचीन समय में मिठाइयों का निर्माण एक बहुत ही श्रमसाध्य और पारंपरिक प्रक्रिया थी।

लड्डू, इमरती, और जलेबी जैसी मिठाइयां बनाने के लिए, लोग गुड़ को पेराई करके शक्कर बनाते थे और फिर उसे विभिन्न प्रकार की मिठाइयों में उपयोग करते थे। यह प्रक्रिया बहुत ही श्रमसाध्य थी, क्योंकि गुड़ को पेराई करने के लिए बैलों या अन्य जानवरों का उपयोग किया जाता था।

इसके अलावा, लाठियां मिठाई भी एक पारंपरिक मिठाई थी जो प्राचीन समय में बनाई जाती थी। यह मिठाई गुड़ और अन्य सामग्री से बनाई जाती थी और इसका स्वाद बहुत ही अच्छा होता था।

प्राचीन समय में मिठाइयों का निर्माण एक बहुत ही पारंपरिक और श्रमसाध्य प्रक्रिया थी, लेकिन आजकल यह प्रक्रिया बहुत ही आसान और आधुनिक हो गई है। लेकिन यह पारंपरिक मिठाइयां आज भी बहुत ही लोकप्रिय हैं और लोग इन्हें बहुत ही पसंद करते हैं।

बिल्कुल सही! वर्तमान समय में, जब लोगों को शुगर और हार्ट की बीमारी हो रही है, तो लोग अपने स्वास्थ्य के प्रति अधिक जागरूक हो रहे हैं और प्राचीन काल में प्रयोग में ले गए गुड का प्रयोग करना ज्यादा उचित समझने लगे हैं।

गुड एक प्राकृतिक और शुद्ध मिठास है जो गन्ने के रस से बनाया जाता है। इसमें कई पोषक तत्व होते हैं जो हमारे शरीर के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं। गुड में आयरन, कैल्शियम, और पोटैशियम जैसे तत्व होते हैं जो हमारे शरीर को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं।

इसके अलावा, गुड का सेवन करने से शुगर और हार्ट की बीमारी का खतरा कम हो सकता है। गुड में मौजूद फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट हमारे शरीर को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं।

आजकल, लोग गुड का प्रयोग विभिन्न प्रकार से कर रहे हैं, जैसे कि गुड की चाय, गुड का शरबत, और गुड की मिठाइयां। यह एक स्वस्थ और प्राकृतिक विकल्प है जो हमारे शरीर को स्वस्थ रखने में मदद कर सकता है।

गुड़ की मिठाई का प्रयोग आजकल बहुत कम हो गया है, जिसकी वजह से लोगों को शुगर की बीमारी से जूझना पड़ रहा है। गुड़ एक प्राकृतिक और शुद्ध मिठास है जो गन्ने के रस से बनाया जाता है, और इसमें कई पोषक तत्व होते हैं जो हमारे शरीर के लिए फायदेमंद होते हैं।

लेकिन आजकल लोग चीनी और अन्य प्रोसेस्ड मिठाइयों का सेवन अधिक करते हैं, जो शुगर की बीमारी का कारण बनता है। गुड़ की मिठाई का प्रयोग करने से शुगर की बीमारी को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है, क्योंकि गुड़ में फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट होते हैं जो हमारे शरीर को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं।

दीपावली जैसे त्योहारों में भी गुड़ की मिठाई का प्रयोग करना एक अच्छा विकल्प हो सकता है, क्योंकि इससे हम अपने स्वास्थ्य को स्वस्थ रख सकते हैं और शुगर की बीमारी से बच सकते हैं। गुड़ की मिठाई बनाने के लिए गुड़ को पिघलाकर उसमें विभिन्न प्रकार के मसाले और सामग्री मिलाए जा सकते हैं, जैसे कि इलायची, दालचीनी, और काजू।

इसलिए, गुड़ की मिठाई का प्रयोग करने से हमें अपने स्वास्थ्य को स्वस्थ रखने में मदद मिल सकती है और शुगर की बीमारी से बच सकते हैं। गुड़ की मिठाई को अपने आहार में शामिल करने से हमें कई स्वास्थ्य लाभ हो सकते हैं।

बिल्कुल सही! दीपावली में पहले लोग मिट्टी के दिए में सरसों का तेल, देसी घी, रुई, और कपड़े की बत्ती का प्रयोग करते थे, जो एक पारंपरिक और प्राकृतिक तरीका था। लेकिन आजकल लोग मोमबत्ती, इलेक्ट्रॉनिक झालर, और अन्य आधुनिक उपकरणों का प्रयोग करने लगे हैं, जो न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुंचाते हैं, बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी हानिकारक हो सकते हैं।

मोमबत्ती और इलेक्ट्रॉनिक झालर का प्रयोग करने से प्रदूषण बढ़ रहा है, क्योंकि इनमें केमिकल और प्लास्टिक का उपयोग होता है, जो वायु और मिट्टी को प्रदूषित करते हैं। इसके अलावा, इन उपकरणों का प्रयोग करने से मच्छरों की संख्या भी बढ़ रही है, क्योंकि वे इन उपकरणों की रोशनी और गर्मी से आकर्षित होते हैं।

इसलिए, हमें अपने पारंपरिक तरीकों को फिर से अपनाने की जरूरत है, जैसे कि मिट्टी के दिए में सरसों का तेल, देसी घी, रुई, और कपड़े की बत्ती का प्रयोग करना। इससे न केवल हमारा पर्यावरण स्वस्थ रहेगा, बल्कि हमारा स्वास्थ्य भी अच्छा रहेगा।

इसके अलावा, हमें अपने त्योहारों को मनाने के तरीके में भी बदलाव करने की जरूरत है, जैसे कि पटाखों का प्रयोग कम करना, और अधिक से अधिक पौधे लगाना। इससे हमारा पर्यावरण स्वस्थ रहेगा और हमारा भविष्य भी सुरक्षित रहेगा।

इस लेख से हमें कई महत्वपूर्ण सीख मिलती हैं जो हमारे जीवन को स्वस्थ और सुखी बनाने में मदद कर सकती हैं। यहाँ कुछ महत्वपूर्ण बातें हैं जो हमें इस लेख से सीखने को मिलती हैं:

*क्या करना चाहिए:*

1. *पारंपरिक तरीकों को अपनाना*: हमें अपने पारंपरिक तरीकों को फिर से अपनाने की जरूरत है, जैसे कि मिट्टी के दिए में सरसों का तेल, देसी घी, रुई, और कपड़े की बत्ती का प्रयोग करना।
2. *गुड़ का प्रयोग करना*: गुड़ एक प्राकृतिक और शुद्ध मिठास है जो गन्ने के रस से बनाया जाता है, और इसमें कई पोषक तत्व होते हैं जो हमारे शरीर के लिए फायदेमंद होते हैं।
3. *प्रदूषण कम करना*: हमें अपने पर्यावरण को स्वस्थ रखने के लिए प्रदूषण कम करने की जरूरत है, जैसे कि पटाखों का प्रयोग कम करना, और अधिक से अधिक पौधे लगाना।
4. *स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहना*: हमें अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने की जरूरत है, और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने की जरूरत है।

*क्या छोड़ना चाहिए:*

1. *मोमबत्ती और इलेक्ट्रॉनिक झालर का प्रयोग*: मोमबत्ती और इलेक्ट्रॉनिक झालर का प्रयोग करने से प्रदूषण बढ़ रहा है, और यह हमारे स्वास्थ्य के लिए भी हानिकारक हो सकता है।
2. *चीनी और प्रोसेस्ड मिठाइयों का सेवन*: चीनी और प्रोसेस्ड मिठाइयों का सेवन करने से शुगर की बीमारी हो सकती है, और यह हमारे स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है।
3. *पटाखों का प्रयोग*: पटाखों का प्रयोग करने से प्रदूषण बढ़ रहा है, और यह हमारे स्वास्थ्य के लिए भी हानिकारक हो सकता है।
4. *आधुनिक उपकरणों का अधिक प्रयोग*: आधुनिक उपकरणों का अधिक प्रयोग करने से हमारा पर्यावरण और स्वास्थ्य दोनों प्रभावित हो सकते हैं।

इस लेख से हमें यह सीख मिलती है कि हमें अपने पारंपरिक तरीकों को फिर से अपनाने की जरूरत है, और अपने पर्यावरण और स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने की जरूरत है।।

- सुख मंगल सिंह
वरिष्ठ साहित्यकार कवि एवं लेखक 
वाराणसी वासी
 अवध निवासी 


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