वो दिल पे नश्तर चला रहा था
रकीब संग मुस्करा रहा था
गिरा का आँचल बदन से अपने
वो हमसे दमन बचा रहा था
पहन के जोड़ा सितारे वाला
अहद वफ़ा का भुला रहा था
जफा निभाता रहा जो हरदम
वफ़ा के किस्से सुना रहा था
जो कम हुई रौशनी शमा की
'सुधीर' के ख़त जला रहा था
सुधीर मौर्या 'सुधीर'
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