कुछ नये सवाल कर दिए
आप तो कमाल कर दिए।
झूठ को उठा के गोद में
सत्य का हलाल कर दिए।
बाप को जलाके आग में
राख को गुलाल कर दिए।
दाल रोटियाँ जो क्या मिली
हर तरह धमाल कर दिए।
लूटने की छूट जब नहीं
मिलके वो बबाल कर दिए
सुधीर कुमार ‘प्रोग्रामर’
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