जिसने तुझको दर्द दिया, उससे हर दर्द छिपाना होगा।
जिसने तुझे रुलाया होगा, हँस कर उसे दिखाना होगा।
जिसने भी जहर दिया तुझको, उस जहर का असर छिपाना होगा।
जो भी कांटे बोयेगा, फूल उसे भिजवाना होगा।
इंसानों के हर जमघट में, बस बहरूपिया बन जाना होगा।
द्वारा
सुधीर बंसल
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