ऐसा क्यूँ लगता है, जब देखतें है, तेरा बंदा मज़बूर होता है,
तू सबके साथ, बस उसी से दूर होता है l
कहने को तू सब कुछ है, पर उसके लिए ग़रीब होता है,
क्या यही सच्चाई है तेरे वजूद की, या कोई ओर बात है,
वरना तेरा ही बंदा क्यूँ बेबस और लाचार रहता है l
हमने भी देखा है इस दुनिया को बड़े करीब से,
जो हेरा-फेरी करे उसी का गरम बज़ार होता है l
जो सच्चाई पे चले उसी का व्यापार सदा चोपट होता है,
करता है जो दिल से तुझे प्यार, उसी से तू दूर रहता है l
जो जाए ना कभी मंदिर, ना पुकारे तुझ को,
तू बस उसी के करीब-करीब रहता है,
तेरी महिमा कोई क्या जाने, जब तेरा इस प्रकार का हिसाब-किताब रहता है l
तुझे तो बस वही समझे जो फटे हाल रहता है..... फटे हाल रहता है ll
लेखक :- श्री निरंजन कुमार बंसल
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