बुरा है क्या और क्या अच्छा दिखाई देता है।
झुठ है क्या और क्या सच्चा दिखाई देता है।
धर्म के नाम पर हम को युँ ना गुमराह करो।
हमे भी आँख से रस्ता दिखाई देता है।
खुशी के जाम से इक रोज उबरकर देखो।
हमारी आँख मे दरिया दिखाई देता है।
सियासी लोगोँ की ये जंग खत्म होने पर।
जहाँ भी देखीये सहरा दिखाई देता है।
आप बतलाइये कि आप को मेरे दिल मे।
गौर से देखने पर क्या दिखाई देता है।
हमे अफसोस यही है कि आज भी उनको।
हमारा रोना तमाशा दिखाई देता है।
वफा की राह मे जाऊँ तो किस तरह जाऊँ।
हर एक मोड पे पहरा दिखाई देता है।
तुम्हे भी इश्क मे बस चोट मिली है शायद।
तभी तो जख़्म ये गहरा दिखाई देता है
'शिव'
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