
जानती हूँ आज फिर
हार जायेगी मेरे दिल की आवाज़
और उसकी वजह होगी मेरी चुप
और तुम फिर रहोगे ख़ामोश
हमेशा की तरह
तुम्हारी इस ख़ामोशी के आगे
देख पा रही हूँ
तुम्हारे अंदर भी
इस पल कुछ ना कह पाने की कसक
मोम बन पिघलने लगी है
जिस की धीमी धीमी
आँच से सुलगने लगी है
मेरे भीतर तुम्हें ना सुन पाने की तिश्नगी
इस आह के साथ
मेरी चुप तुम्हारी ख़ामोशी के साथ
कुछ लम्हों का सफ़र
कई सदियां बन तय करेंगे
सीमा गुप्ता
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