लक्ष्मी पूजा के दिन कुछ भक्तों ने निश्चय किया। रात को दीपक बुझने के बाद दरवाजा खुला रखें। लक्ष्मी आएगी।
लक्ष्मी तो न आयी; चोर सारा माल ले उड़े।
लोगों की हंसी के मध्य पछताने से भी क्या होता? तब उल्लू की चिन्ता में थे। अब उल्लू बना दिये गए थे।
शशांक मिश्र ’भारती’
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