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विश्व मस्तिष्क दिवस

 

विश्व मस्तिष्क दिवस: स्वस्थ मस्तिष्क, सशक्त मानव जीवन

सत्येन्द्र कुमार पाठक

हमारे शरीर का सबसे रहस्यमयी, जटिल और शक्तिशाली अंग है—मस्तिष्क  हमारी हर एक सोच, भावना, स्मृति, निर्णय क्षमता और शारीरिक नियंत्रण का केंद्र यही है। शरीर का केवल 2% वजन रखने वाला यह अंग हमारी कुल ऊर्जा और ऑक्सीजन का लगभग 20% हिस्सा अकेले उपभोग करता है। ऐसे महत्वपूर्ण अंग की देखरेख, बीमारियों से बचाव और न्यूरोलॉजिकल देखभाल के प्रति वैश्विक जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से हर साल 22 जुलाई को विश्व मस्तिष्क दिवस मनाया जाता है । 

विश्व मस्तिष्क दिवस मनाने की पहल वर्ल्ड फेडरेशन ऑफ न्यूरोलॉजी  द्वारा की गई थी। वर्ल्ड फेडरेशन ऑफ न्यूरोलॉजी  की स्थापना 22 जुलाई 1957 को हुई थी। पहला आयोजन: वर्ष 2013 में 'सार्वजनिक बोर्ड मामलों की समिति' द्वारा दिए गए प्रस्ताव के बाद, 22 जुलाई 2014 को पहली बार आधिकारिक तौर पर विश्व मस्तिष्क दिवस मनाया गया। तभी से हर वर्ष 22 जुलाई को दुनिया भर के न्यूरोलॉजिस्ट, स्वास्थ्य संगठन और आम लोग एकजुट होकर मस्तिष्क स्वास्थ्य से जुड़े किसी एक विशिष्ट विषय (Theme) पर ध्यान केंद्रित करते हैं।

आज की आधुनिक जीवनशैली, अत्यधिक मानसिक तनाव, खान-पान में गड़बड़ी और बढ़ती उम्र की आबादी के कारण न्यूरोलॉजिकल (तंत्रिका संबंधी) विकार वैश्विक स्तर पर एक बड़ी चुनौती बनकर उभरे हैं।

विश्व स्वास्थ्य संगठन और डब्ल्यू एफ एन के अनुसार: न्यूरोलॉजिकल स्थितियाँ दुनिया भर में विकलांगता  का सबसे बड़ा कारण और मृत्यु का दूसरा सबसे बड़ा कारण हैं। अल्जाइमर और डिमेंशिया (भूलने की बीमारी), स्ट्रोक (मस्तिष्क का दौरा), मिर्गी , पार्किंसंस, माइग्रेन, तथा ब्रेन ट्यूमर जैसे विकार करोड़ों लोगों को प्रभावित कर रहे हैं।: दुनिया के कई विकासशील और पिछड़े देशों में न्यूरोलॉजिस्ट और आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं की भारी कमी है, जिससे समय पर जाँच और इलाज नहीं मिल पाता।

सार्वजनिक जागरूकता बढ़ाना: मस्तिष्क संबंधी बीमारियों के शुरुआती लक्षणों (जैसे अचानक बोली लड़खड़ाना, हाथ-पैर में कमजोरी, या याददाश्त में अत्यधिक गिरावट) को पहचानने के लिए लोगों को जागरूक करना। : कई न्यूरोलॉजिकल समस्याओं (विशेषकर स्ट्रोक) को सही जीवनशैली और स्वास्थ्य प्रबंधन के माध्यम से रोका जा सकता है। समान स्वास्थ्य अधिकार: दुनिया के हर व्यक्ति तक, चाहे उसकी आर्थिक स्थिति कैसी भी हो, गुणवत्तापूर्ण न्यूरोलॉजिकल देखभाल पहुँचाना। मस्तिष्क से जुड़ी जटिल बीमारियों के नए इलाज और दवाओं की खोज के लिए वैज्ञानिक शोधों का समर्थन करना।।मस्तिष्क की कार्यक्षमता को जीवन भर बनाए रखने और बीमारियों से बचने के लिए हमें दैनिक जीवन में इन आदतों को अपनाना आवश्यक है:।

ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर खाद्य पदार्थ (जैसे अखरोट, अलसी), हरी पत्तेदार सब्जियाँ, बेरीज़ और एंटी-ऑक्सीडेंट्स मस्तिष्क कोशिकाओं की मरम्मत करते हैं। अत्यधिक चीनी, जंक फूड और प्रोसेस्ड खाने से परहेज करें। रोजाना 30 मिनट का व्यायाम (जैसे पैदल चलना, योग या तैराकी) मस्तिष्क में रक्त और ऑक्सीजन का प्रवाह बढ़ाता है। इसके साथ ही सुडोकू, पहेलियाँ सुलझाना, किताबें पढ़ना या नई भाषाएँ सीखना दिमाग के 'न्यूरोप्लास्टिसिटी'  गुण को बनाए रखता है।

गहरी नींद के दौरान मस्तिष्क अपने हानिकारक टॉक्सिन्स को बाहर निकालता है और यादों को व्यवस्थित करता है। रोजाना 7 से 8 घंटे की निर्बाध नींद मस्तिष्क के लिए रीसेट बटन का काम करती है।

अत्यधिक तनाव मस्तिष्क के आकार और उसकी कार्यप्रणाली पर नकारात्मक प्रभाव डालता है। ध्यान (Meditation) और प्राणायाम तनाव हार्मोन को नियंत्रित करते हैं। साथ ही धूम्रपान और अत्यधिक शराब के सेवन से मस्तिष्क की नसें क्षतिग्रस्त होती हैं।

परिवार, दोस्तों और समाज के साथ सकारात्मक जुड़ाव डिमेंशिया और अवसाद (Depression) के खतरे को काफी हद तक कम करता है। "मस्तिष्क नहीं, तो जीवन नहीं।" विश्व मस्तिष्क दिवस हमें याद दिलाता है कि जिस तरह हम अपने दिल, लिवर या फेफड़ों की देखभाल करते हैं, उतनी ही - या उससे भी अधिक - देखभाल हमारे मस्तिष्क को चाहिए। इस दिवस पर हमें स्वयं के मस्तिष्क स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहने, बीमारियों के प्रति समाज में फैली भ्रांतियों को मिटाने और सभी के लिए बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं का समर्थन करने का संकल्प लेना चाहिए।


करपी , अरवल , बिहार 804419

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