उतर जाओ कुर्सी से नेता तुम इसके काबिल नहीं हो
कपडे तो तुमने सफेद पहने है मन से तुम साफ नहीं हो
खून चूसा है तुमने जनता का राक्षस हो इंसान नहीं हो
कुर्सी पाने की चाहत में हजारों वादे किए अब निभाते नहीं हो
लूटा है तुमने अपने घर को घर के तुम रक्षक नहीं हो
उतर जाओं कुर्सी से नेता तुम इसके काबिल नहीं हो
सतीश कुमार चाँद
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