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साहस और बलिदान की मूरत कंचन बाई मेघवाल

 
साहस और बलिदान की मूरत कंचन बाई  मेघवाल 

नीमच की कंचन बाई मेघवाल एक नाम नहीं, बल्कि ममता, साहस और बलिदान की अमर मिसाल।जब आंगनवाड़ी के 20 मासूम बच्चों पर मधुमक्खियों ने अचानक हमला किया, तो कंचन जी ने पल भर भी नहीं सोचा। उन्होंने बच्चों को बचाने के लिए खुद को डंक के सामने खड़ा कर दिया।हजारों डंक झेले।अपनी जान कुर्बान कर दी।लेकिन 20 घरों के चिराग बुझने नहीं दिए।उनका यह त्याग इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज रहेगा।उल्लेखनीय है कि मधुमक्खियों के  हमले  से लोगों  के घायल होने की घटनाएं आए  दिन  समाचार पत्रों  में  पढ़ने को मिलती रहती है।विगत वर्ष ही में उज्जैन के मक्सी रोड स्थित पुलिस ट्रेनिंग सेंटर में मधुमक्खियों के हमले में टीआई  के निधन व 5 अन्य पुलिसकर्मियों के घायल हुए की अत्यंत पीड़ादायक घटना घटित हुई । घटनाओं  को  देखे तो  ज्यादातर  जहाँ  धुआँ उठ रहा  हो  उस  स्थल  पर ज्यादा  घटित  होती  है| स्कूल,कालेज ,पार्क, गुफा , ऐतिहासिक इमारतों,धार्मिक स्थलों  पर ,श्मशान घाट ,वृक्ष आदि जगहों पर से मधुमख्खियों के छत्तों को हटवाया  जाना चाहिए|क्योकि एक तरफ का हमला  मधुमक्खियों व दूसरी तरफ इससे बचने हेतु मची भगदड़ मे घायल होने और जान माल की हानि का अंदेशा बना रहता है |मधुमक्खियों के ज्यादा दंश से मृत्यु होने की सम्भानाओ से इंकार नहीं किया जा सकता|मधुमक्खी के छत्ते से छेड़छाड़ ना करें | जहाँ मधुमक्खियों का छत्ता हो उससे दूर रहकर सतर्कता बरती जाए या छत्तों को हटाये  जाने हेतु प्रशिक्षित व अनुभवी लोगो की मदद से हटवाया जाना चाहिए |
संजय वर्मा "दृष्टि "मनावर (धार ) मप्र

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