सूखी नदियों की गुहार
सूरज की तपन
सूरज की तपन
झुलसा रही धरती को
नदिया सूखी
पत्थर झांक रहे नदियों से
आते जाते लोगों के पग को
निशान बन
पगडंडी कहलाने लगे।
बादल गुहार कर रहे
हवा से
हमें नदियों का करना है श्रृंगार
बरस जाना
उन्हीं नदी के पावन जल से
करेंगे जलाभिषेक
और सूर्य को देंगे अर्ध्य।
प्रार्थना करेंगे
नदियों को सूखा न रखे
भर दे पेट नदियों का पानी से।
संजय वर्मा "दृष्टि"
मनावर जिला धार मप्र
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