Swargvibha
Dr. Srimati Tara Singh
Administrator

सूखी नदियों की गुहार

 
सूखी नदियों की गुहार

सूरज की तपन
झुलसा रही धरती को
नदिया सूखी
पत्थर झांक रहे नदियों से
आते जाते लोगों के पग को
निशान बन
पगडंडी कहलाने लगे।
बादल गुहार कर रहे
हवा से
हमें नदियों का करना है श्रृंगार
बरस जाना 
उन्हीं नदी के पावन जल से
करेंगे जलाभिषेक
और सूर्य को देंगे अर्ध्य।
प्रार्थना करेंगे
नदियों  को सूखा न रखे
भर दे पेट नदियों का पानी से।
संजय वर्मा "दृष्टि"
मनावर जिला धार मप्र

Powered by Froala Editor

LEAVE A REPLY
हर उत्सव के अवसर पर उपयुक्त रचनाएँ