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Dr. Srimati Tara Singh
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पावन नदी

 
पावन नदी

नदियाँ कलकल करते स्वर  
प्रकृति के संगीत के स्वर में 
मिलाने को जैसे हो रहे हो उत्सुक 
और साथ में बहाकर ले जाती थी 
उपहार के रूप में पेड़ के पत्ते और पुष्प।
 
ताकि सागर में समाहित होकर  
सागर के चरणों में 
बह कर रख सके कुछ पूजा के फूल 
ऐसा लगने लगता कि 
हम सभी पावन नदियां का
मिलकर करते आरहे है
वर्षो से पूजन।
 
माना हमने भी 
नदियों का पूजन होता सर्वश्रेष्ठ
और पर्यावरण की पूजा करने के समान भी है 
नदी जो की हर जीवों में 
प्राण फूंकने की क्षमता रखती 
और सुनाती बारिश में कलकल का मधुर संगीत 
हमारी नदियां ही तो हमारी देवी है।
संजय वर्मा"दृष्टि"
मनावर जिला धार मप्र

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