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यह मुक़ाम कुछ और -दोहा संग्रह

 
यह मुक़ाम कुछ और -दोहा संग्रह

कुँअर उदयसिंह 'अनुज ' का दोहा -संग्रह "यह मुकाम कुछ और "मात्राओं का साहित्यिक गणित है जिसमे भाव यानि बात कहने का आशय बड़ी ही चतुराई से दोहाकार  कह जाता है | जिस प्रकार से तुलसी दासजी ने रामायण की विस्तृत भूमिका सटीक दोहों में  की | दोहा भी कठिन विधा है जैसे  शास्त्रीय संगीत | दोहो को पढ़े तो  किसानो की लचरता उनकी बोई फसलों पर आपदा प्रभाव हो जाने से किसान अपनी गुहार ऊपर वाले से तो करता ही है|  साथ ही एक गुहार दोहो में कुछ यूँ बयां कि 'हे दिल्ली के देवता ,पूछूँ एक सवाल /कीचड़ लिपटे पाँव के ,कब बदलेंगे हाल 'वाद्य यंत्रों की अपनी पहचान उसके बजने पर लगाई जाती रही है किन्तु आधुनिकता के दौर में कई वाद्य यंत्र विलुप्प्ता की कगार पर जा खड़े है | 'तोड़ गया दम गाँव से ,अब ढोली का ढोल /साँसे फूली बेंड की ,सुन डी  जे के बोल ' काफी गहराई की बात दोहो में ढाली | प्रेम की  बातें भले ढाई अक्षर में बोली गई हो यहाँ दोहाकार बड़ी ही खूबसूरती से प्रेम के भाव में रूठने का संकेत कुछ इस तरह बताया -'हँसना भूली खिड़कियाँ ,मुस्काना घर-बार /जब से मुँह फेरे खड़ा ,मुझसे मेरा प्यार '| स्कूल से छुट्टी होने पर बच्चों को मौज मस्ती की ही सूझती | वाकई बचपन के दिन बेफिक्री के न कोई चिंता बस अपने मित्रों के साथ खेलना बतियाना आदि रहता था | कहते है बचपन लोट के नहीं आता -बूढ़ा बरगद कह रहा ,बच्चे मुझे न भूल /शाला से तू लौटकर ,आ कर मुझ पर झूल 'वही पत्र लेखन कला को मोबाइल ने भले सरल किया हो किंतु शब्दों की सुंदरता और कलम और कागज के मिलान से उत्पन्न शब्दों को लिखना यानि शब्दों के भाग्य लिख रहे होने का अहसास होता था | साथ ही अक्षरों की सुंदरता से सामने वाला प्रभावित हो जाता था | मोबाइल का टोटका ,कैसी तीतर -फांद /चिट्ठी मेरे चाँद की ,हुई ईद का चाँद ' इसप्रकार 'यह मुकाम कुछ और ' में एक से बढ़कर एक दोहे अनुजजी ने रचे है | पठनीयता  दोहों के प्रति आकर्षणता को बरकरार  रखती है और यही पर दोहाकार की कुशलता दिखलाई पडती है | अनुज जी आत्म कथ्य में में दोहों  बारे में लिखी वह बहुत ही सटीक है - दोहा अपनी सम्पूर्ण ऊर्जा और शक्ति के साथ समकालीन दौर की एक महत्वपूर्ण विधा है| बेहतरीन आवरण पृष्ठ से सजी दोहा कृति साहित्य क्षेत्र में अपनी अलग ही पहचान बनाकर साहित्य उपासको के दिल को छू जाएगी | हमारी यही शुभकामनाएं है | 
दोहाकार -कुँअर उदयसिंह 'अनुज '
दोहा संग्रह - यह मुक़ाम कुछ और 
प्रकाशक -सुभद्रा पब्लिशर्स एंड डिस्ट्रीब्यूटर्स 
डी -४८ गली न. 3 दयालपुर करावल नगर ,दिल्ली -110094 
मूल्य -200 /-

समीक्षक -संजय वर्मा 'दृष्टि '
125 ,शहीद भगतसिंह 

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