21 को परछाई का गायब होना व आने वाले ग्रहण की खगोलीय घटना
उज्जैन के समीप ग्राम डोंगला में 21 जून को शनिवार दोपहर 12 बजे के बाद खगोलीय घटना होगी |सूर्य उत्तरायण से दक्षिणायन में गमन करेगा और कर्क राशि में प्रवेश करेगा साथ ही कर्क रेखा ग्राम डोंगला से होकर गुजरती है |सूर्य कर्क रेखा पर लंबवत होने के कारण परछाई कुछ समय के लिए नहीं दिखती | इस दिन से रातें लंबी व दिन छोटे होने लगते है | ग्राम डोंगला में वराहमिहिर खगोलीय वेधशाला में शंकु यंत्र के माध्यम से शून्य छाया का अवलोकन भी किया जा सकता है एवं जंतर मंतर( यंत्र महल )उज्जैन से भी खगोलविदों से भी विस्तृत जानकारी प्राप्त की जा सकती है| ग्राम डोंगला में शून्य रेखा व कर्क रेखा का क्रॉस बिंदु पर प्लेट फार्म बनाकर उस स्थान को चिन्हित किया गया है |21 जून को उत्तरी गोलार्द्ध वर्ष का सबसे लंबा दिन होता है, जबकि दक्षिणी गोलार्द्ध में सबसे छोटा दिन होता है। इस समय के दौरान, पृथ्वी का उत्तरी ध्रुव सूर्य की ओर अपने अधिकतम झुकाव पर होता है और सूर्य 23.5º उत्तरी अक्षांश पर, यानी कर्क रेखा के साथ सीधे ऊपर की ओर दिखाई देता है। 21 जून को कर्क रेखा पर स्थित स्थानों पर सूर्य का प्रकाश कुछ पलों के लिए सीधे पड़ता है|जिसके कारण परछाई का विलुप्त होना होता है|खगोलीय घटना के अध्ययन हेतु खगोलशास्त्रियों और इस विषय में रूचि रखने वाले एकत्रित होते है |सूर्य ग्रहण और चंद्रग्रहण को खुली आँखों से नहीं देखना चाहिए |आने वाला चंद्र ग्रहण का अध्ययन किया जाना चाहिए|पिछले वर्ष को लगा चंद्र ग्रहण एक दुर्लभ घटना इसलिए माना जाता है कि इस दिन चन्द्रमा तीन रंगों में यानि सूपर मून ,ब्लूमून ,और ब्लड मून |सूपर मून ,पृथ्वी के करीब आने पर उसका आकर काफी बड़ा दिखता|ब्लड मून पृथ्वी के वायु मंडल से गुजरते हुई रौशनी जब चाँद पर पड़ती तब चन्द्रमा हल्का तांबे के रंग के सामान दिखाई पड़ता|ब्लूमून पूरे आकर में निकलना|ब्लूमून विगत वर्ष में बार दो बार निकला|पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर गिरती है उसे चंद्र ग्रहण कहते है |इस तरह की दुर्लभ संयोग वर्षो बाद घटित होता है|ग्रहण के दौरान अक्सर पूर्व से बनाए गए खाद्य पदार्थों को खाने से परहेज किया जाता रहा |इसके पीछे वैज्ञानिक कारण भी है|नदियों में स्नान की परम्परा सूतक काल के बाद की जाती है|ग्रहण का प्रभाव ज्योतिष गणना में भी शामिल किया जाता है|चंद्रमा की तीन रंगों की दुर्लभ खगोलीय घटना देखने के लिए और उसके बारे में समझने के लिए विद्यार्थियों और खगोलशास्त्र में रूचि रखने वालों के लिए ये संयोग बेहद उपयोगी रहा था|देखा जाये तो सूर्य ,चंद्र ,मंगल ,बुध ,गुरु ,शुक्र एवं शनि ग्रह ज्योतिष गणना में प्रमुख माने गए है ।साथ ही राहु -केतु ग्रह ,जिसका अपना अलग प्रभाव एवं कथाएँ प्रचलित है । ये भी ज्योतिष गणना का आधार मजबूत करते है ।नए ग्रह जीजा,शेरॉन और सेरेंश की पूर्व में खोज की गई थी ।वर्तमान में वैज्ञानिकों ने धरती के समान सात नए ग्रहों का पता लगाया,जहाँ पर पानी और जीवन मिलने की संभावना जताई है ।ये ग्रह 40 प्रकाश वर्ष की दूरी पर एक तारे की परिक्रमा करते है।इन सात ग्रहों के नाम क्या रखे जाए? ये मुद्दा अब चर्चा में है ।अब तक सौरमंडल के बाहर 3500 ग्रहों की खोज हुई है।नए सात ग्रह सूर्य से आउटर ग्रह की श्रेणी में आते है।जो ग्रह सूर्य से इनर की श्रेणी में है ,उनमे गुरुत्वाकर्षण शक्ति तथा प्रभाव ज्यादा होता है।जो आउटर की श्रेणी में है ,उनमें प्रभाव कम होता है।भविष्य में कई नए ग्रह आउटर श्रेणी में हो सकते।जिनकी खोज भविष्य में होगी एवं जिनका परिभ्रमण लाखों /करोड़ों साल में ब्रहाण्ड में होता होगा? सारांश वर्तमान में यह है कि माने गए 9 ग्रह अपना प्रभाव गुरुत्वाकर्षण के जरिए दिखाते आ रहे है ।जिसके आधार पर ज्योतिष गणना का भी महत्व है ।सूर्य से दूरी भी नए ग्रहों के प्रभाव को करती होगी ?इसलिए भविष्य की गणना के लिए ज्योतिष में नए ग्रह सम्मिलित नहीं किए जाते होंगे।ऐसी परिस्थिति नए सात ग्रहों के साथ भी संभव बनेगी।खगोल वैज्ञानिकों ने ऑक्सीजन और मीथेन जैसे महत्वपूर्ण गैसों की खोज ,वहाँ पर इन नए ग्रहों पर बसने हेतु जीवन के उम्मीद की अंतरिक्ष में संभावना बनेगी।ग्रहण,परछाई का विलुप्त होना आदि खगोलीय घटनाओं की जानकारी ज्ञानार्जन में वृद्धि के लिए जहाँ आवश्यक है वही शोध के लिए हर बार एक नया आधार भी बनेगा |
संजय वर्मा "दृष्टि "
मनावर (धार ) मप्र
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