Swargvibha
Dr. Srimati Tara Singh
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तरुणाई

 
तरुणाई

प्यार एक सीमित रेखा है
तरुणाई उम्र का आकर्षण है
तपस्या प्रेम की
विश्वामित्र नही जो भंग ना हो
सब अपनी अपनी जगह सही
हौसला नहो तो
प्रेम टूटा
जैसे टूटता है तारा
और उसी तारे को गवाह बनाया
प्रेम के सपने बुनते
प्रेम से हटकर
विवाह होता
तो फ़ांसी जैसी कसक होती
महसूस
रिश्तों की सूली पर
प्रेम झूल जाता है।
वर्षो की हा नही में
प्रेम भाप बन उड़ जाता है
लेकिन भाप प्रेम की बूंदों को
ढक्कन पर छोड़ जाता
विवाह सात फेरो का संकल्प
कभी बूढ़ा नही होता
वो संकल्प शक्तियां याद दिलाता
मगर प्रेम होता अमर
क्योकि प्यार का
वाउचर जो डलवा रखा
दिल की चिप में
उम्र भर के लिए।

संजय वर्मा "दृष्टि"
125 ,बलिदानी भगत सिंह मार्ग
मनावर जिला धार मप्र




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