Swargvibha
Dr. Srimati Tara Singh
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सुबह

 

सुबह
सुप्रभात बतलाता तालाब को अलविदा करता रात को खिले कमल और सूरज की किरणों की लालिमा लगती चुनर पहनी होफिजाओं ने गुलाबी खिलते कमल लगते तालाब के नीर ने लगाई हो जैसे पैरों में महावर भोर का तारा छुप गया उषा के आँचल पंछी कलरव ,माँ की मीठी पुकार सच अब तो सुबह हो गई
श्रम के पांव चलने लगे अपने निर्धारित लक्ष्य और हर दिन की तरह सूरज देता गया धरा पर ऊर्जा|
संजय वर्मा "दृष्टि "मनावर जिला धार मप्र


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