Swargvibha
Dr. Srimati Tara Singh
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शिक्षकों का सम्मान और संस्कृत को बढ़ावा मिले

 
शिक्षकों का सम्मान और संस्कृत  को बढ़ावा मिले 


यदिशिक्षक आप नही होते तो आदर सम्मान की परिभाषा कहाँ से सीख पाते एवंज्ञानार्जन में वृद्धि भी नही हो पाती।जो सीखा गया है उसका पालन करना चाहिए।बच्चों ने अपने शिक्षक का आदर सम्मान भी करना चाहिए|ज्ञान में ही आदर सम्मान जुड़ा होता है |जिसे हम सभी शिक्षण के दौरान प्राप्त करते है | नैतिक शिक्षा अपने आप में बहुत महत्व रखती है |कुछ गलती हो तो लोग बाग़ ताना मार ही देते है -'क्या यही सिखाया था '|शिक्षक के लिए हर बच्चा कोहिनूर ही होता है|शिक्षक के अलावा अपने से बड़ों का सम्मान करना भी सीखे |यही ज्ञान जीवन पर्यन्त तक बेहतर जीवन के लिए मूलमंत्र सिद्ध होगा |वर्तमान में बड़ो का मान सम्मान करना तो कई बच्चे भूलते जा रहे है |वे इलेक्ट्रानिक दुनिया के सम्मोहन में बंधे से जा चुके है |स्कूली जीवन की अनगिनत यादों को आज जब याद करते है तो बचपन की यादों में खो कर मुस्कान चेहरे पर आ जाती है ।शिक्षक अपने ज्ञान और अनुभव को सभी विधार्थियों में बाटते और दी गई शिक्षा को हम सभी ध्यान पूर्वक पढ़ते और समझते थे । शिक्षक जब कक्षा में आते तो सब खड़े होकर उनका अभिवादन करते और जब परिवार के साथ बाजार में जाते और रास्ते में शिक्षक मिल जाए तो पापा- मम्मी के संग शिक्षक को नमस्कार करते ,यही आदर -सम्मान की भावना शिक्षक से हमसे स्कूल जीवन में सीखी थी जो आज हमारे दिल में बड़े होने एवं बड़े पद पर विधमान होने पर सजीव है।चुनाव का वाक्या याद आता है|जब मुझे पीठासीन अधिकारी पद और मेरे शिक्षक जिन्होंने मुझे पढ़ाया था उन्हें मेरे अंडर में पोलिंग अधिकारी नंबर १ पर नियुक्त किया गया ।चुनाव में और भी अधिकारी मेरी चुनाव संबंधी सहायता हेतु मेरे साथ थे । चुनाव सामग्री पद के हिसाब से संभालने का दायित्व था हम सभी अपनी -अपनी सभी चुनाव सामग्री लेकर बस की और चलने लगे ।मैने देखा की ये तो अपने शिक्षक है |जिन्होंने बचपन में मुझे पढ़ाया था|वे अब बुजुर्ग हो चुके थे और उनसे उनकी सभी सामग्री और स्वयं का भारी बेग भी उठाए नहीं जा रहा था ।मैने शिक्षकजी से कहा - "सर ये सब आप मुझे दीजिए मै लेकर चलता हूँ "।शिक्षकजी ने कहा कि -" आप तो हमारे अधिकारी है आप से कैसे उठवा सकता हूँ " मैने कहा आपने तो हमे शिक्षा के साथ सिखाया था "आदर सम्मान का पाठ " आप की शिक्षा के बदौलत ही मै आज बड़े पद पर नौकरी कर रहा हूँ ,ये क्या कम है ? मैने ,मेरे शिक्षकजी की चुनावी सामग्री और बैग उठा लिए ।शिक्षकजी ,की आँखों में आँसू छलक पड़े और मन में साहस का हौसला भर गया यही शिक्षक सेवा से प्राप्त ज्ञान अच्छे कार्य हेतु सदैव जीवन भर प्रेरणा के स्त्रोत ओर आधार स्तंभ रहेंगे |
एक जानकारी के मुताबिक संस्कृत शिक्षक संघ दिल्ली द्धारा राजधानी विद्यालयों में संस्कृत के हित में कई लोगों ने अपने विचार रखे|संस्कृत संरक्षण संवर्धन के लिए समर्पित रहने के लिए बात रखी|जो प्रशंसनीय है| वर्तमान में संस्कृत भाषा अपने ही देश मे पराई होकर अस्तित्व तलाश रही है ,यह कटु सत्य है |संस्कृत भाषा के अध्ययन को बढ़ावा दिया जाना आवश्यक होगा ताकि संस्कृत अपना मूल स्थान पाकर विलुप्त होने से बच सके |यह सही है की कोई भी भाषा बोलते -लिखते समय अंग्रेजी प्रयोग का समावेश होता ही है| शुद्ध भाषा का प्रतिशत इसी कारण कम होता जा रहा है|जर्मन वैज्ञानिको ने इस बात की पुष्टि कर दी है कि अंग्रेजी ने प्राथमिक वैज्ञानिक भाषा के रूप मे जर्मन पर अधिपत्य जमा लिया है|अंग्रेजी इस समय एक वायरस के रूप मे कार्य कर रही है ,जिससे प्रभावित होकर अन्य देशों कि प्रचलित भाषाए भी अंग्रेजी से पीड़ित हो गई है|मानाकि अंग्रेजी का ज्ञान आज के इलेक्ट्रॉनिक युग बेहद आवश्यक है ,कितु उससे इतने भी प्रभावित न हो कि अपनी प्राचीन संस्कृत  भाषा मे भी अंग्रेजी का प्रयोग करके उसकी गरिमा व सम्मान के हक़ को छिन लें |क्या हम मनीषियों की भाषा को ऐसे ही खो जाने देंगे ? शास्त्रों ,पुराणों,ग्रंथों की मूल भाषा जिसका हम वंदन करते आए है वह हमारे सबके लिए एक धरोहर होकर आज भी सम्मानीय है |लेकिन उसको बढ़ावा देने मे हम अब भी पीछे है |पिछले वषो में  अमेरिका में ओकलाहामा प्रान्त के सीनेट  सत्र की शुरआत के अवसर पर यूनिवर्सल सोसाइटी आफ हिंदुइजा के अध्यक्ष राजन जेड ने संस्कृत के वेदमंत्रों से मंत्रोच्चारण कर शुभारंभ किया | कई देशों में संस्कृत में हनुमान चालीसा ,आरती की चौपाइयां विदेशी लोग गाते है | कहने का मतलब ये है की संस्कृत के प्रति उनका लगाव है | किंतु वर्तमान में ऐसा लगने लगा है की संस्कृत भाषा अपने ही देश मे पराई होकर अस्तित्व तलाश रही है|यह कटु सत्य है |संस्कृत भाषा के अध्ययन को बढ़ावा दिया जाना आवश्यक होगा ताकि संस्कृत अपना मूल स्थान पाकर विलुप्त होने से बच सके |यह सही है कि कोई भी भाषा बोलते -लिखते समय अंग्रेजी प्रयोग का समावेश होता ही है| शुद्ध भाषा का प्रतिशत इसी कारण कम होता जा रहा है | अंग्रेजी इस समय एक वायरस के रूप मे कार्य कर रही है ,जिससे प्रभावित होकर अन्य देशों कि प्रचलित भाषाए भी अंग्रेजी से पीड़ित हो गई है | मानाकि अंग्रेजी का ज्ञान आज के इलेक्ट्रानिक युग बेहद आवश्यक है ,कितु उससे इतने भी प्रभावित न हो कि अपनी भाषा/ प्राचीन संस्कृत  भाषा मे भी अंग्रेजी का प्रयोग करके उसकी गरिमा व सम्मान के हक़ को छिन लें |शिक्षकों द्वारा संस्कृत को बढ़ावा देने से संस्कृत शिक्षा के क्षेत्र में पूर्व की भाति अपना प्रभाव पुनर्स्थापित कर सकेगी|
नेपाल में चीन की बढ़ती दखलंदाजी को समझना आवश्यक है |चीन पहले भी  इलेक्ट्रानिक उपकरणों, मेहंदी,मंझा आदि सस्ते और शरीर को हानि पहुंचने वाले वस्तुओं को यहाँ पहुँचाता रहा | वर्तमान में चीन की सरकार ने नेपाल में चीनी भाषा मंदारिन पढ़ने वाले शिक्षकों के वेतन का खर्च उठाने का प्रस्ताव दिया है|जबकि नेपाल के स्कूलों में विदेशी भाषा पढ़ने की अनुमती है|किन्तु स्कूल किसी विदेशी भाषा को अनिवार्य नहीं कर सकते है फिर भी अनदेखी की जाकर चीन प्रलोभन देकर अपने पैर पसारता जा रहा है | नेपाल और चीन के बीच 14 समझौते हुए थे | समझौते अपनी जगह है | चीन की शुरू से ही चाल दक्षिण एशिया में पकड़ बढाने की रही है |चीन नेपाल को प्रलोभन देता आरहा है | इसे देखते हुए हमे सामरिक हितो की सुरक्षा करनी होगी|नेपाल को चीन निजी स्कूलों में चीनी भाषा की अनिवार्यता की घुसपैठ  करना किस बात की मंशा को जन्म दे रहा है | 
ये समझना भी आवश्यक है |परीक्षा में नंबर कम आने या पूरक, अनुतीर्ण होने पर शिक्षकों को दोष देना उचित नहीं है क्योकिं दूसरे बच्चे जो संग पढ़ते उनके नंबर अच्छे आये |यदि ठीक से पढ़ाया नहीं जाता तो दूसरे बच्चों के अंक पर भी प्रभाव पढता |बच्चों ने एकाग्रचित हो के पढ़ना और नहीं समझ आए दस बार पूछना चाहिए|मन में नहीं पूछने की आदत को दूर कर बिना भय के अपने गुरु से पूछना ही उचित निर्णय होता है | अपनी पढाई को वक्त ज्यादा से ज्यादा देना भी फलदायक होता है|जो हुआ उसे भूलकर तनाव रहित होकर पुनः अध्ययन में जुट जाना चाहिए|अक्सर कई बच्चे कम नंबर आने पर अपनी कमियों को दूर कर दोबारा उसी कक्षा की शरू करते वे हताश नहीं होते और ये भी नहीं सोचते की दूसरे बच्चे क्या कहेंगे | इसके अलावा बच्चों ने इस बात पर भी ध्यान देना होगा की स्कूल ,कॉलेज के दिनों पढाई की शिक्षा के साथ बच्चों ने अपने गुरु का आदर सम्मान भी करना चाहिए| ज्ञान के साथ ही आदर सम्मान जुड़ा होता है |जिसे हम सभी शिक्षण के दौरान प्राप्त करते है | नैतिक शिक्षा अपने आप में बहुत महत्त्व रखती है |कुछ गलती हो तो लोग बाग़ ताना मार ही देते है -क्या यही सिखाया था|गुरु के लिए हर बच्चा कोहिनूर ही  होता है| पढाई खूब मन लगा कर करें |गुरु के अलावा अपने से बड़ों का सम्मान करना भी सीखे | यही सीख  जीवन पर्यन्त तक बेहतर जीवन के लिए मूलमंत्र सिद्ध होगी |  भागदौड़ की व्यस्तम जिंदगी में अक्सर देखा है | बहुत से माता पिता अपने बच्चों की परीक्षा  के समय ज्यादा नंबरों की उम्मीद रखते है | साथ ही बच्चों पर ज्यादा अंक लाने  का दबाव बनाते है। जिससे बच्चों की मनोस्थिति घबराहट भरी ,लोग क्या कहेंगे कि होड़,से एकाग्रता का भटकाव उत्पन्न होता है । परीक्षा उपरांत कई बच्चे घर से भाग जाते और कई ख़ुदकुशी को अपनाते है।ये सब करना अनुचित होता है।अंकों की होड़ में शामिल होने के बजाए अपनी एकाग्रता ,लगन ,विश्वास आदि से की गई पढाई और अपने शिक्षकों द्धारा पढाये गए विषयों को एकाग्रचित होकर मनन करना ही श्रेष्ठ होता है।नबरों के लिए प्रतिस्पर्धा का भाव मन में नहीं रखना सब साथ पढ़ने वाले मित्र है।जो ताउम्र तक याद रहते और अपनी मित्रता निभाते है।खैर ,हर माता पिता अपने बच्चे के चेहरे पर खुशी देखना चाहता है और पूरा परिवार भी उम्मीद लगाए रखता है।ऐसे में कोई गलत कदम लेना बुजदिली ही कही जाएगी।ख़राब रिजल्ट यानि कम अंकों  का तनाव नहीं मन में लाना चाहिए  और अपने साथियों को भी यही बात समझाना चाहिए कि  जीवन में आगे भी कई प्रतिस्पर्धा आती है।जिससे कभी घबराना नहीं बल्कि मुकाबला करना चाहिए।उदाहरण के तौर पर चींटी को देखों बार -बार दीवार पर चढ़ती और गिर जाती मगर हिम्मत नहीं हारती।   
संजय वर्मा 'दॄष्टि "
125,बलिदानी भगत सिंह मार्ग
मनावर जिला धार मप्र

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