Swargvibha
Dr. Srimati Tara Singh
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प्रेम का रंग

 
प्रेम का रंग

लहराती जुल्फों में 
ढक जाती तुम्हारे माथे की 
बिंदिया 
लगता हो जैसे बादलों ने 
ढाका हो चाँद को। 

कलाईयों में सजी चूडियाँ 
अँगुलियों में अँगूठी के नग से
निकली चमक
पड़ती है मेरी आँखों में
जब तुम हाथों में सजे
कंगन को घुमाती हो।

सुर्ख लब
कजरारी आँखों में लगे
काजल से
तुम जब मेरी और देखो
तब तुम्हें केनवास पर
उतरना चाहूँगा।

हाथों में रची मेहंदी
रंगीन कपड़ों में लिपटे
चंदन से तन को देखता
सोचता हूँ
जितने रंग भरे तुम्हारी
खूबसूरत सी काया में
गिनता हूँ
इन रंगों को दूर से
अपने कैनवास पर उतारना
चाहता हूँ तस्वीर
जब तुम सामने हो मेरे
पास हो मेरे।

दूर से अधूरा पाता रंगों को
शायद उसमे प्रेम का रंग
समाहित ना हो ।

संजय वर्मा "दृष्टि "
१ २ ५ ,शहीद भगतसिंग मार्ग
मनावर जिला -धार (म.प्र )
9893070756 

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