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प्रकृति का पुजारी है वसंत उत्सव

 
प्रकृति का पुजारी है वसंत उत्सव

वसंत पंचमी जो अबूझ मुहूर्त माना जाता है।यह विवाह आदि मांगलिक कार्य तथा नवीन प्रतिष्ठान के लिए श्रेष्ठ दिन वसंत पंचमी होता है।ऋतुराज वसंत आने पर वृक्षों पत्तियां अभिवादन के लिए जमीन पर बिछ जाती है ।टेसू के फूल खिलने लगते है |आमों के वृक्ष पर आए मोर (आम के फूल ) ऐसे लगते मानों जैसे सेहरा बांध रखा हो  एवं नव कोपले स्वागत गीत गा रही हो । ऋतुराज वसंत गुलाबी ठंड प्रकृति में नया रस घोलता है ।वृक्ष .वसंत के सूचक और हमारे जीवन में  उपयोगी,पूजनीय रहे है ।सूखे पहाड़ो पर बिना पत्ती के वृक्ष अपनी वेदना किसे बताये बारिश होगी तभी इन वृक्षों पर हरियाली अपना डेरा जमा सकेगी।बस इन्हें इन्सान काटे ना |क्योकि होली के समय चोरी से ऐसे वृक्षों को बेजान समझकर ,बिना अनुमति के लोग काटने का प्रयत्न करने की फ़िराक मे रहते है |वृक्षों से ही जंगल, पहाड़ का सोंदर्य है |वृक्ष ही इन्सान के मददगार एवं अंतिम पड़ाव तक का साथी होता है व पशु,पक्षियों को आसरा होता है।वसंत पंचमी दिन से प्रकृति सुंदर टेसू आवरण ओढ़ कर वसंत उत्सव में एक नई ऊर्जा प्रदान करती है।आओ सब मिलकर वसंत उत्सव मनाए।
संजय वर्मा"दृष्टि"
मनावर जिला धार

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