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पिता की यादें

 
पिता की यादें

बिछोह
हर किसी के जीवन में आता 
और बोल कर नहीं आता
चुपके दबे पाँव आता 
इसकी खबर
उम्र को भी पता नहीं चलती 
डबडबाए नैना 
मन अंदर से जब रोता 
लगता आँसुओं का बांध 
फूटने वाला हो 
जिसे रोक रखा 
तस्वीर देखती पलकों ने। 
पिता की यादें 
काम पर जाते समय 
जा रहा हूँ
अब हो चुके मौन।
आँसू भरे नैन
जैसे अमर होगए हो यादों के 
जब याद करें और देखे तस्वीर
तब फिर से बरसने
लगते नैन। 
संजय वर्मा 'दॄष्टि '
मनावर जिला धार मप्र

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