पिता अब दूर चले गए
उनकी सांसों से मेरी खुशियां
क्योंकि पिता का हाथ मेरे सर पर जो है
पिता उंगली पकड़ के
ले जाते स्कूल
मेरे थकने पर गोद मे उठा लेते
ये रोज का काम था
मै परीक्षा में पास होता चला गया
बड़ी कक्षा में मेरे बढ़ते कदम
अचानक रुक से गए
पिता अब दूर चले गए
जहाँ से कोई लौट के नही आता
आती है सिर्फ यादें।
अब में अकेला स्कूल जाता
ऐसा लगता पिता संग हो मेरे
स्कूल के गेट तक जाने के बाद
पीछे मुड़ कर देखता हूँ
अब कोई नही दिखता
दिखते सिर्फ मेरी आँखों मे आंसू।
संजय वर्मा"दृष्टि"
125,बलिदानी भगतसिंह मार्ग
मनावर जिला धार मप्र
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