पहाड़ पर भी हो वृक्षारोपण
देखा जाए तो वृक्ष, इंसान के मददगार व अंतिम पड़ाव तक का साथी होते है ।वृक्ष, पशु -पक्षियों को आसरा प्रदान करते है।अतः बिना पत्तियों के वृक्षों को सूखा समझ कर जलाने हेतु बिना अनुमति के ना काटे |क्योकि ये सूखे दिखने वाले वृक्षों पर बारिश के मौसम में इन पर हरियाली छा सकती है ।आज भी कई क्षेत्रों में दाहसंस्कार में कंडों का ही पूर्ण रूप से उपयोग किया जाता है। जो की पर्यावरण हित में है ।पेड़ों और पर्यावरण को बचाने में कंडों का उपयोग ज्यादा मात्रा में करने से परम्पराओं का निर्वहन बेहतर तरीके से होकर पर्यावरण संतुलन बना रहता है।पौधारोपण भविष्य के लिए इस तरह किया जाए की विकास कार्यों के लिए भविष्य में वृक्ष बली ना चढ़ सके |अक्सर देखा गया की पूर्व से निर्धारित प्लान न होने से अकस्मात बनाए गए विकास कार्यो में वृक्षों को काटा गया है |फिर वैकल्पिक वृक्षारोपण की प्रक्रिया अपनाई जाती है |ये सांप -सीढ़ी के खेल की भाती हो जाता है |नग्न हो रहे पहाड़ो पर,पहाड़ों का तन ढकने के लिए वृक्षारोपण पहाड़ो पर ज्यादा संख्या में अनिवार्यता से किया जाना चाहिए |ताकि पर्यावरण का संतुलन बना रहे एवं विकास कार्यो से भविष्य में वृक्ष प्रभावित ना होने पाए।
संजय वर्मा 'दृष्टि '
125 शहीद भगतसिंग मार्ग ,
मनावर जिला धार मप्र
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