माननीय प्रधानमंत्री का भी यही संकल्प है की 2029 नशावृति की बुराई जड़ से खत्म हो जाए इसके लिए नशे की प्रवृति को छोड़ कर नशा मुक्ति के पथ पर चला जाए | नशा नाश की जड़ है ,नशा अपने साथ बुराई एवं विकृति लाता है | नशा मुक्ति के क्षेत्र में कई पंथ,संस्थाए कार्य कर रही है |मप्र सरकार द्वारा भी नशा मुक्ति अभियान समय समय पर चलाए जाते है| नशा मुक्त बने मध्यप्रदेश| नशा वर्तमान और भावी पीढ़ियों को करता है बर्बाद| नशामुक्त जीवन हो समाज ।इस हेतु नशे की बुराइयों से मुक्त करने के लिए जागरूकता गतिविधियों के माध्यम से लोगों को समझाए कि नशे से दूर रहें और स्वस्थ जीवनशैली अपनाएँ।नशा न केवल व्यक्ति के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है बल्कि परिवार और समाज पर भी बुरा असर डालता है।साथ ही नशा-मुक्त समाज के निर्माण में अपना योगदान दें।इसके लिए पारिवारिक,सामाजिक और सरकारी सपोर्ट सिस्टम होना आवश्यक है।तभी नशा मुक्ति संभव होगी। खास तौर से युवाओं के बीच नशीले पदार्थों के सेवन का बढ़ता चलन अब एक बड़ी समस्या बनता जा रहा है।किसी भी प्रदेश का भविष्य और तरक्की वहां के युवाओं पर टिकी होती है। देश की युवा पीढ़ी अगर गलत रास्ते पर चली जाए तो निश्चित तौर पर उनका जीवन अंधकारमय हो सकता है। नशे का मानसिक, सामाजिक और पारिवारिक स्तर पर भी बुरा असर पड़ता है| नशा मुक्त बने मध्यप्रदेश नशा वर्तमान और भावी पीढ़ियों को करता है बर्बाद, नशामुक्त जीवन हो समाज ।नशे की बुराइयों से मुक्त करने के लिए जागरूकता गतिविधियों के माध्यम से लोगों को समझाए कि नशे से दूर रहें और स्वस्थ जीवनशैली अपनाएँ।नशा न केवल व्यक्ति के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है बल्कि परिवार और समाज पर भी बुरा असर डालता है।नशे से दूर रहकर शिक्षा, स्वास्थ्य और परिवार पर ध्यान केंद्रित करने के लिए लोगो को प्रेरित करें।साथ ही नशा-मुक्त समाज के निर्माण में अपना योगदान दें।इसके लिए पारिवारिक,सामाजिक और सरकारी सपोर्ट सिस्टम होना आवश्यक है।तभी नशा मुक्ति संभव होगी।नशीले पदार्थों के सेवन से होने वाला नुकसान हमारी कल्पना से कहीं अधिक घातक और जानलेवा होता है। खास तौर से युवाओं के बीच नशीले पदार्थों के सेवन का बढ़ता चलन अब एक बड़ी समस्या बनता जा रहा है।किसी भी प्रदेश का भविष्य और तरक्की वहां के युवाओं पर टिकी होती है। देश की युवा पीढ़ी अगर गलत रास्ते पर चली जाए तो निश्चित तौर पर उनका जीवन अंधकारमय हो सकता है। नशे का मानसिक, सामाजिक और पारिवारिक स्तर पर भी बुरा असर पड़ता है।ऐसी कई परिस्थियाँ निर्मित होती है | जिससे स्वास्थ्य पर प्रभाव पड़ता ही है साथ ही आर्थिक स्थिति भी कमजोर बनती है | नशीले पदार्थो के बढ़ते चलन पर अंकुश लगना चाहिए | इसके प्रति लोगों में जागरूकता लाने की आवश्यकता है।वही शराब के लत के कारण आर्थिक ,शारीरिक स्थिति कमजोर हो जाती है।नशामुक्ति के लिए सर्वसुविधायुक्त पुनर्वास केंद्र की तहसील ,जिला स्तर पर जहां नही हो वहां आवश्यकता है। नशामुक्ति के लिए चिन्हित 19 धार्मिक नगरी पर इसका कितना असर होता है।उसके बाद अन्य नगरों पर प्रयोग किया जाए ताकि सम्पूर्ण मध्यप्रदेश नशामुक्ति की मिसाल बन सकें।इसके लिए पारिवारिक,सामाजिक और सरकारी सपोर्ट सिस्टम होना आवश्यक है।तभी नशामुक्ति संभव होगी।नशीले पदार्थों के सेवन से होने वाला नुकसान हमारी कल्पना से कहीं अधिक घातक और जानलेवा होता है। खास तौर से युवाओं के बीच नशीले पदार्थों के सेवन का बढ़ता चलन अब एक बड़ी समस्या बनता जा रहा है।किसी भी प्रदेश का भविष्य और तरक्की वहां के युवाओं पर टिकी होती है। देश की युवा पीढ़ी अगर गलत रास्ते पर चली जाए तो निश्चित तौर पर उनका जीवन अंधकारमय हो सकता है। नशे का मानसिक, सामाजिक और पारिवारिक स्तर पर भी बुरा असर पड़ता है।नशीले पदार्थो के सेवन के कुछ उदाहरण भी देखने को मिलते है |कुछ लोग शराब पीकर रातों को बने शहंशाह सुबह हो जाते भिखारी बच्चे स्कूल जाते समय पापा से मांगते पॉकेट मनी ताकि छुट्टी के वक्त दोस्तों को खिला सके चॉकलेट| फटी जेब और खिसियानी हंसी बच्चों को दे न पाती पॉकेट मनी और उनके लिए कभी कुछ कर न पाती बच्चों के चेहरे की हंसी को छीन लेती और उजाड़ जाती जिंदगी में बने हुए ख्वाब।शराब पीकर के वाहन चलाना, एवं यातायात के नियमों का पालन नही करने से दुर्घटनाए होती है | ऐसी कई परिस्थियाँ निर्मित होती है | जिससे स्वास्थ्य पर प्रभाव पड़ता ही है साथ ही आर्थिक स्थिति भी कमजोर बनती है | नशीले पदार्थो के बढ़ते चलन पर अंकुश लगना चाहिए | इसके प्रति लोगों में जागरूकता लाने की आवश्यकता है।एक घटना याद आरही है |दीपावली के दिन की घटना याद आ रही है |उस दिन मे बाहर बैठा हुआ ऊपर आकाश मे उडते पंछी को देख रहा था की वो पंछी अपनी चोंच मे दाना लेकर चूजो को खिला रहा था |पंछी का अभिवादन चूजे पंखो को फडफड़ा कर तालियों के समान कर रहे थे | ऐसा लग रहा था की मानों रोज दीवाली हो | ठीक उसी पेड के नीचे बने घर मे माँ अपने भूखे बच्चों के लिए दीपावली के दिन अपने पति का इंतजार इस उम्मीद से कर रही थी की वो इनके ले कुछ ना कुछ तो जरुर लायेंगे |किन्तु शराब के नशे मे धनतेरस पर जुवें मे हार कर लडखडाते कदमो से घर आने पर मोहल्ले वाले करने लगे उसका गालियों से अभिवादन |और मे बैठा सोचने लगा की अच्छा है पंछी शराब नहीं पीते |नहीं तो उनके भी हालात उस इंसान की तरह हो जाते जिनके बच्चे दीपावली पर्व पर पेड के नीचे बने घर मे भूखे सो गए थे |वो शराबी इंसान अब इस दुनिया मे नहीं रहा किन्तु उनकी माँ मजदूरी कर के अपने बच्चों के संग बीन पति के दीपावली मना रही और सोच रही है की पति शराब नहीं पीते तो बच्चे अपने पिता के संग पटाखे और रोशनी के दीप जलाते|इंसान को नशे से दूरी रखना जरुरी है |
संजय वर्मा 'दृष्टि '
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