नशामुक्त रहे स्वस्थ रहें
समाज को नशे की बुराइयों से मुक्त करने के लिए जागरूकता गतिविधियों के माध्यम से लोगों को समझाए कि नशे से दूर रहें और स्वस्थ जीवनशैली अपनाएँ।नशा न केवल व्यक्ति के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है बल्कि परिवार और समाज पर भी बुरा असर डालता है।नशे से दूर रहकर शिक्षा, स्वास्थ्य और परिवार पर ध्यान केंद्रित करने के लिए लोगो को प्रेरित करें।साथ ही नशा-मुक्त समाज के निर्माण में अपना योगदान दें।इसके लिए पारिवारिक,सामाजिक और सरकारी सपोर्ट सिस्टम होना आवश्यक है।तभी नशामुक्ति संभव होगी।नशीले पदार्थों के सेवन से होने वाला नुकसान हमारी कल्पना से कहीं अधिक घातक और जानलेवा होता है। खास तौर से युवाओं के बीच नशीले पदार्थों के सेवन का बढ़ता चलन अब एक बड़ी समस्या बनता जा रहा है।किसी भी प्रदेश का भविष्य और तरक्की वहां के युवाओं पर टिकी होती है। देश की युवा पीढ़ी अगर गलत रास्ते पर चली जाए तो निश्चित तौर पर उनका जीवन अंधकारमय हो सकता है। नशे का मानसिक, सामाजिक और पारिवारिक स्तर पर भी बुरा असर पड़ता है।बऐसी कई परिस्थियाँ निर्मित होती है | जिससे स्वास्थ्य पर प्रभाव पड़ता ही है साथ ही आर्थिक स्थिति भी कमजोर बनती है | नशीले पदार्थो के बढ़ते चलन पर अंकुश लगना चाहिए | इसके प्रति लोगों में जागरूकता लाने की आवश्यकता है।
उजड़ जाती जिंदगी
शराब क्या होती है ख़राब
कोई कहता गम मिटा ने की दवा
जिंदगी में कितने गम
और कितने ही कर्म
दोस्तों की शाम की महफ़िल
जवां होती ,हसीं होती
बड़े दावे बड़ी पहचान के दावे
सुबह होते होजाते निढाल
रातो को राह डगमगाती
जैसे भूकंप आया
या फिर कदम लड़खड़ाते
हलक से नीचे उतर कर
कर देती बदनाम
जैसे प्यार में होते बदनाम
शराबी और दीवाना
एक ही घूमती दुनिया के तले
मयखाने करते मेहमानों का स्वागत
जैसे रंगीन दुनिया की बारात आई
तमाशो की दुनिया में
देख कर हर कोई हँसता /दुबकता
दारुकुट्टिया नामंकरण हो जाता
रातों का शहंशाह
सुबह हो जाता भिखारी
बच्चे स्कूल जाते समय पापा से
मांगते पॉकेट मनी
ताकि छुट्टी के वक्त दोस्तों को
खिला सके चॉकलेट
फटी जेब और
खिसयाती हंसी
दे न पाती और कुछ कर न पाती
बच्चों के चेहरे की हंसी छीन लेती
इसलिए होती शराब ख़राब
सुनहरे ख्वाब दिखाती
किंतु पुरे ना कर पाती
डायन होती है शराब
पुरे परिवार को खा जाती
और उजड़ जाते जिंदगी ख्वाब।
संजय वर्मा 'दृष्टि '
मनावर (धार )मप्र
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