मेरी दोस्त गौरैया
दस्तक मेरे दरवाजे पर
चहकने की तुम देती गौरैया
चाय,बिस्किट लेता मैं
तुम्हारे लिए रखता
दाना-पानी
यही है मेरी पूजा
मन को मिलता सुकून
लोग सुकून के लिए
क्या कुछ नहीं करते
ढूंढते स्थान
गौरैया का घोंसला
मकान के अंदर
क्योंकि वो संग रहती
इंसानों के साथ
हम खाये और वो घर में
रहे भूखी
ऐसा कैसे संभव
दान और सुकून
इन्हें देने से स्वतः
आपको मिलेगा
हो सकता है हम
अगले जन्म में बने गौरैया
और वो बने इंसान
दोस्ती - सहयोग
कर्म के रूप में
साथ रहेंगे|
संजय वर्मा 'दृष्टि'
मनावर जिला धार मप्र
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