कुत्तों के भय से परेशान है अब समाधान की आवश्यकता है
आवारा व पालतू कुत्तों के हमले से परेशान है 70 प्रतिशत भारतीय |लोग आवारा पशुओं की समस्याओं से जूझ रहे है |समस्या के समाधान के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे है | हैदराबाद में बना अंतर्राष्ट्रीय स्तर के अनुरूप देश का पहला 'डॉग पार्क'लोगों की मांग थी कि सावर्जनिक बगीचों में कुत्तों को घूमने की इजाजत नहीं दी जाती ,इसलिए पालतू कुत्तों के लिए अलग से पार्क बनाए की आवश्यकता महसूस की गई|वहां पर कुत्तों के प्रशिक्षण और कसरत के उपकरण भी लगाए गए है| देखा जाए तो प्राचीन काल से ही कुत्तों और गायों के लिए घरों में रोटी बनाकर रखी जाती रही है|पांडवो के साथ हिमालय जाते समय कुत्ता भी साथ था|सुरक्षा व सूंघने से पकड़ने की शक्ति के कारण ये देश की सुरक्षा व्यवस्था में उपयोगी सिद्ध हुए है|पालतूों कुत्तों के मालिकों द्धारा उनकी उचित देखभाल की जाना चाहिए|ताकि दूसरों को परेशानी का सामना न करना पड़े|साथ ही रेबीज के टीके की उपलब्ध्ता प्रत्येक चिकित्सालयों में होनी चाहिए |पीड़ित को आवश्यकता पड़ने पर भटकना न पड़े|खैर कुत्ते को पालना महंगा शौक है |कुत्ते पालने के शौकीनों को इनके अपने द्धारा दिए गए नामों से पुकारा जाता है|धरती पर रहने का अधिकार इंसान के अलावा पशु पक्षियों का भी है |तो क्यों न हम उनके हितों का ध्यान रख कर आवारा पशुओं को आवारा कहने के बजाए आश्रयहीन कहना चाहिए |आवारा पशु प्रबंधन के बुनियादी ढांचे और संचालन के लिए सभी नगर पालिका,नगर निगम, पंचायतो के लिए धन उपलब्ध कराना आवश्यक होगा ताकि इन पर व्यवस्थित तरीके से नियंत्रण हो सकें |
संजय वर्मा 'दृष्टि '
125 बलिदानी भगत सिंह मार्ग
मनावर (धार )
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