कुतिया
मोहल्ले में रात को भोकती कुतिया
सतर्क कर देती
कोई आ रहा है ?
सभी धर्म के लोग उसे रोटी डालते
वो खा लेती
दुम आभार स्वरूप हिलाती ।
कुतिया के पिल्ले को
चोरी से कुछ लोग उठा ले गये
माँ का स्नेह -दुलार क्या होता है
उन्हें इससे क्या वास्ता ?
रोती -कराहती कुतिया
ढूंढ रही अपने बच्चों को
वो अब दी जाने वाली रोटी भी
नहीं खा रही ।
खाए भी तो कैसे
बच्चों के माँ से अलग होने का दर्द
एक माँ ही समझ सकती
सतर्क कर देती
कोई आ रहा है ?
सभी धर्म के लोग उसे रोटी डालते
वो खा लेती
दुम आभार स्वरूप हिलाती ।
कुतिया के पिल्ले को
चोरी से कुछ लोग उठा ले गये
माँ का स्नेह -दुलार क्या होता है
उन्हें इससे क्या वास्ता ?
रोती -कराहती कुतिया
ढूंढ रही अपने बच्चों को
वो अब दी जाने वाली रोटी भी
नहीं खा रही ।
खाए भी तो कैसे
बच्चों के माँ से अलग होने का दर्द
एक माँ ही समझ सकती
जैसे भ्रूण -हत्या होने पर
इंसानों में माँ को होता है
दर्द ।
कुतिया सोच रही है
यदि मै इन्सान होती तो बताती
इंसानों को अपनी वेदना
कौन सुने -समझे उसकी वेदना
वो समझ रही है
कैसे -कैसे दुनिया में है
बेदर्दी इन्सान जो करते है भ्रूण हत्या
और कुछ लोग चुराकर दूर करते है
हमसे हमारे पिल्लै।
संजय वर्मा 'दृष्टि '
125,शहीद भगतसिंग मार्ग
मनावर जिला -धार (म प्र )
इंसानों में माँ को होता है
दर्द ।
कुतिया सोच रही है
यदि मै इन्सान होती तो बताती
इंसानों को अपनी वेदना
कौन सुने -समझे उसकी वेदना
वो समझ रही है
कैसे -कैसे दुनिया में है
बेदर्दी इन्सान जो करते है भ्रूण हत्या
और कुछ लोग चुराकर दूर करते है
हमसे हमारे पिल्लै।
संजय वर्मा 'दृष्टि '
125,शहीद भगतसिंग मार्ग
मनावर जिला -धार (म प्र )
स्वरचित


3 Attachments • Scanned by Gmail
Powered by Froala Editor

LEAVE A REPLY