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Dr. Srimati Tara Singh
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कृषि औजारों बनाने की कला

 
कृषि औजारों बनाने की कला रोजगार में उपयोगी

स्वदेशी अपनाओ अभियान अंतर्गत लोहे के कृषि औजार निर्मित करना है |लोहार का अपना मूल व्यवसाय खेती और किसान के साथ जुड़ा हुआ है।वर्तमान में खेती आधुनिक यंत्रों का उपयोग कर की जाती है।किंतु कई क्षेत्रों में हाथों से निर्मित किये कृषि औजार ही उपयोग में लाये जाते है जैसे ट्रेक्टर के बजाए बैल द्वारा की जा रही है।ये सब आर्थिक स्थिति पर निर्भर करता है।पहले मोट-थालों के द्वारा कुएं से पानी निकाल कर सिंचाई की जाती थी अब ये साधन विलुप्त होगए जिससे इन्हें बनाने वालों के व्यवसाय पर असर पड़ा।अब मोटर द्वारा सिंचाई की जाती है।औजार का पर्याप्त ज्ञान सफलता की संभावनाओं को खोल सकता है। इन कृषि औजारों का उपयोग मुख्य रूप से खरपतवार उन्मूलन, उर्वरक, सामान्य जुताई, उन्मूलन और धूमन के लिए आज भी किया जाता है।जैसे हल, पास,कुसला,दराता चिमटा, खुरपी, सरतन आदि औजार लोहार निर्मित करते है एवं उन्हें सुधारते भी है।इनको बनाने की कला पीढ़ी दर पीढ़ी प्राप्त होती है किंतु कृषि औजार का प्रशिक्षण यदि लोहार द्वारा युवा पीढ़ी को दिया जाए तो रोजगार की दिशा में यह व्यवसाय और कला अवश्य लाभान्वित करेगी।और तो और किसान भी स्वयं इसका निर्माण एवं सुधार भी कर सकेगा।क्योंकि ये आधुनिक यंत्रों जो महंगे होते है।ये कला सीख जाने पर आर्थिकता का बोझ कम होगा साथ ही समय की बचत होगी।
संजय वर्मा "दृष्टि"
125,बलिदानी भगत सिंह मार्ग लोहार पट्टी
मनावर जिला धार मप्र

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