जिंदगी
डरी -डरी सी दहशत से भरी जिंदगी
पग -पग पर भय से भरी जिंदगी
मुड -मुड सी पलट से भरी जिंदगी
सूनी राहों पर दबोची जा रही जिंदगी।
हैवानियत से सनी जा रही जिंदगी
हर चौराहों पर अब चीख रही जिंदगी
चीखों को रोकों जरा हैरान है जिंदगी
दुष्कर्मियों पर कसों फंदा रो रही जिंदगी।
बलात पीड़ित की सिसकती रही जिंदगी
सुरक्षा की सबसे मदद मांग रही जिंदगी
कलयुग भी हैरान देख ये दुःख भरी जिंदगी
गुहार किससे करें ढूंढ़ रही आंसू भरी जिंदगी।
स्तब्ध है सारी दुनिया देख लाचार भरी जिंदगी
बेटियों की ये दशा कहा गई सुरक्षा भरी जिंदगी
कड़ी सजा कब मिले ये इंतजार कर रही जिंदगी
बिना भय के रह सके ये प्रार्थना कर रही जिंदगी।
संजय वर्मा "दृष्टि "
मनावर जिला धार मप्र
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