गाय का ध्यान रखें
पशु पालकों से जो गाय की सेवा पर काम ध्यान देते व उन्हें भूखी प्यासी बाजारों में छोड़ देते है | किन्तु कुछ पहल जो ठीक है जैसे देशी गायों को बचाने वाली राष्ट्रीय नीति बने के साथ देश भर में देशी नस्ल की गायों की संख्या में तेजी से आ रही कमी पर राष्ट्रीय हरित ट्रिब्यूनल (एनजीटी ) की चिंता करने के साथ राष्ट्रीय नीति तैयार करने की पहल सराहनीय है|गाय का दूध गुणात्मक दृष्टी से अच्छा होने के बावजूद कम मात्रा मे प्राप्त होता है |दूध अधिक मिले ,इसके लिए गाय और भैस का दूध की प्रक्रिया कुछ लोग क्रूर और अमानवीय तरीके से निकालते है|गाय का दूध निकालने से पहले उसके छोटे बछड़े को पिलाया जाना चाहिए।वर्तमान मे लोग बछड़ों का हक़ कम करते है ,साथ ही इजेक्शन देकर दूध बढाने का प्रयत्न करते है जो की उचित नहीं है | प्राचीन ग्रंथो में कामधेनु ,पदमा आदि गाय का काफी महत्व बताया है।गाय की पूजा की जाती है ,पर्यावरण की दिशा मे गाय के दूध ,गोबर,गोमूत्र ,घी ,दही,आदि का स्वास्थ्य ,हवन-पूजन आदि के कार्यो उपयोग कर लाभ प्राप्त किया जा सकता है। कहते है की गाय को स्पर्श मात्र से व्याधियां दूर होती एवं गोमूत्र चिकित्सा विधि, धार्मिक कार्यो में गंगाजल के समान शुद्धिकरण में उपयोग में लाया जाता है ।भगवान श्रीकृष्ण को गोपाल के नाम से पुकारा जाता है ।आज भी कई घरो में गाय की रोटी रखी जाती है ,कई स्थानो पर संस्थाए गौशाला बनाकर पुनीत कार्य कर रही है किन्तु दुःख इस बात का होता है की लोग बाग इन पशुओं को भटकने को बाजारों में छोड़ देते है उन्हें इनके भूख प्यास की कोई चिंता ही नहीं |पशुओं के कारण यातायात व्यवस्था भी प्रभावित होती है साथ ही दुर्घटना होने की संभावना बनी रहती है।पशु पालक पशुओं को पालने का शौक रखते है तो उन्हें बाजारों में न छोड़े।उनकी देखभाल अपनी निगरानी में करें तो दुर्घटना घटित होंने में कमी आएगी।

संजय वर्मा "दृष्टि "
मनावर (धार )मप्र
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