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Dr. Srimati Tara Singh
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गंगा सप्तमी एवं गंगा दशमी

 

गंगा सप्तमी एवं गंगा दशमी पर गंगा जल स्नान करने का काफी महत्व है 


हर साल वैशाख मास  शुक्ल पक्ष की 23 अप्रैल सप्तमी तिथि को गंगा सप्तमी मनाई जाती है | गंगा सप्तमी के दिन माँ गंगा की पूजा और दान-पुण्य करना अत्यंत लाभकारी माना जाता है |पौराणिक कथाओं के अनुसार भगीरथ के तप से प्रसन्न होकर मां गंगा पृथ्वी पर अवतरित हुई थी | माँ गंगा का वेग इतना तेज था कि अगर वह सीधे पृथ्वी पर आती तो काफी परेशानी हो सकती थी | तब गंगा के वेग को भगवान शिव ने अपनी जटाओं में समाहित कर लिया था | गंगा सप्तमी के दिन गंगा में स्नान शुभ फलदायी मन जाता है |25 मई को आने वाले गंगा दशमी का काफी महत्व है | गंगा नदी का प्राचीन ग्रंथों में उल्लेख है |राजा भगीरथ ने कठोर तपस्या कर धरती पर लाकर पुनीत कार्य किया | गंगा नदी का अवतरण शुक्ल पक्ष,माह ज्येष्ठ की दशमी तिथि को हुआ | इसी से इस दिन को गंगा दशमी कहते है | कई  क्षेत्रों में इसे गंगा दशहरा भी कहते है |गंगा दशहरा के दिन गंगा स्नान का विशेष महत्व है। इसके बाद दान-पुण्य करना चाहिए। ऐसा करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और पितृ भी संतुष्ट होते हैं। गंगा के घाट पर जाकर पिंडदान, तर्पण, दान, श्राद्ध और दीपदान करना चाहिए| 

जो गंगा नदी में स्नान करने जा नहीं सकते वे घर पर गंगाजल डाल कर स्नान कर लेंगें तो फल की प्राप्ति होती है | श्रद्धा और आस्था,विश्वास  के साथ की गई पूजा ,स्नान ,दान से सभी पापों से मुक्ति मिलती है| यही भाव माँ गंगा जी की आरती करते समय प्रार्थना के रूप में होते है | 

गंगा आरती 

ओम जय गंगे माता, श्री जय गंगे माता ।
जो नर तुमको ध्याता, मनवांछित फल पाता ॥
चंद्र सी जोत तुम्हारी, जल निर्मल आता ।
शरण पड़े जो तेरी, सो नर तर जाता ॥
॥ ओम जय गंगे माता..॥
पुत्र सगर के तारे, सब जग को ज्ञाता ।
कृपा दृष्टि तुम्हारी, त्रिभुवन सुख दाता ॥
॥ ओम जय गंगे माता..॥
एक ही बार जो तेरी, शरणागति आता ।
यम की त्रास मिटाकर, परम गति पाता ॥
॥ ओम जय गंगे माता..॥
आरती मात तुम्हारी, जो जन नित्य गाता ।
दास वही सहज में, मुक्ति को पाता ॥
॥ ओम जय गंगे माता..॥
ओम जय गंगे माता, श्री जय गंगे माता ।
जो नर तुमको ध्याता, मनवांछित फल पाता ॥
ओम जय गंगे माता, श्री जय गंगे माता ।

गंगा नदी हमारी संस्कृति का अहम हिस्सा है | इसे प्रदूषण मुक्त करना भी हमारी जिम्मेदारी है| गंगा शुद्धिकरण अभियान के तहत इसमें डॉल्फिन मछलियां भी डाली गई हअ| इसके अलावा  समय -समय पर शासन द्वारा सफाई का ध्यान भी रखा जाता रहा है | किंतु  आगे जाकर कई शहरों का निकास का पानी नालों  के रूप में समाहित होता है इस पर ध्यान दिया जाना आवश्यक है| 

माँ गंगा की छोटी धारा का नर्मदा नदी में समाहित होने का उदाहरण इस प्रकार भी मिलता है |इंदौर से मनावर 127 किमी की दूरी पर मनावर जिला धार के अंतर्गत मनावर से 25 किमी की दरी पर स्थित गांगली  गांव स्थित है ये कालांतर में गंगा से गांगली हो गया | ये नर्मदा के तट पर स्थित है | यहाँ पवित्र कुंड विधमान है| जिसमे निरंतर गंगा का जल प्रवाहित होता रहता है | इस जल की  पुष्टि गंगा नदी के जल से की गई जिसको हूबहू जल का होना पाया गया | ये जल बहकर नर्मदा के जल में मध्य में इसे सातमात्रा  के नाम से भी पुकारा जाने लगा यहाँ  माँ गंगा और नर्मदा का मिलन होता है | यहाँ शिवलिंग भी है जो नंदिकेश्वर के नाम से जाना जाता है | प्राचीन स्थान का पुराण( स्कंध पुराण के रेवाखंड और शिव पुराण )में लेख है | पंडित प्रदीप जी मिश्रा ने होशंगाबाद जिले के सेमरी हरचंद गाँव में कथा वाचन के दौरान मनावर(गांगली -साततलाई ) का के नाम का उल्लेख किया था |यहाँ दशमी को भव्य मेला भी लगता है | गंगा दशहरे  पर भारी भीड़ रहती है | ये स्थल सरदार सरोवर के डूब क्षेत्र में आने से जब पानी नहीं रहता तब दर्शन श्रद्धालुओं के लिए सुलभ होते है | यहाँ देश के सभी प्रांतो से गूगल मेप के जरिये स्थान खोज कर दर्शन का लाभ लेते है | यहाँ पहुंचने के दो रास्ते है | एक सिंघाना गणपुर होकर एवं एक मनावर से पक्का डामर एवं सीमेंट रोड से सेमल्दा रोड़ पर वायल, पचखेड़ा  होकर करोली फाटा आता है | वहाँ पर क्रांतिकारी टंटिया मामा की प्रतिमा से करोली फाटा से पिपलाज,के आगे से ग्राम बीजाबयड़ी से टर्न होकर मात्र २ किमी की दूरी पर गांगली (साततलाई )में गंगा कुंड निर्मित है|  कुंड में ऊपर से जाली लगी है ताकि कोई उसमे ना गिरे | कुंड में दूसरी और स्नान हेतु पेढ़िया  बनी हुई है | ग्राम का नाम साततलाई में सात तलाई है जिसमे से दो तलाई में पानी भरा हुआ है | उसके समीप प्राचीन शिव मंदिर है | और उसी क्षेत्र में जागोद, बागोद दो शिव मंदिर है।जहाँ शुद्ध घी का भंडारा डेढ़ वर्ष तक चला था।दर्शनीय स्थल में माँ गंगा का माँ नर्मदा के जल में विलय होने  का स्नान एवं दर्शन लाभ अवश्य लेना चाहिए |गंगा दशहरे के दिन धार्मिक मेला लगता है।माँ गंगा का सप्तमी एवं दशमी(गंगा  दशहरा) पर पवित्र नदियों में स्नान अवश्य करें |  

संजय वर्मा "दृष्टि "
125 बलिदानी भगत सिंह मार्ग 
मनावर जिला धार मप्र

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