दो जून
जाने क्यों बढ़ जातारोटी का महत्वजब कटोरदान सेझांक रही होतीरखी हुई रोटी
भूखे खाली पेट मेंसमाहित होने कीत्वरित अभिलाषाताकि प्रसाद के रूप मेंरोटी से तृप्त हो
रोटी कैसी भी हो
धर्मनिर्पेक्षता काप्रतिनिधित्व करतीभाग -दौड़ भी
दो जून की रोटी की
भूख मिटाने के लिए
करनी पड़ती सबको।
संजय वर्मा "दृष्टि "
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