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Dr. Srimati Tara Singh
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चंपा का फूल

 
चंपा का फूल

चंपा के फूल 
जैसी काया  तुम्हारी 
मन को आकर्षित 
कर देती जब खिल जाती हो चंपा की तरह 
भोरे .तितलियों के संग 
जब भेजा हो सुगंध का सन्देश 
वातावरण हो जाता है सुगंधित 
और मन  हो जाता  मंत्र मुग्ध।

जब  सँवारती  हो चंपा के फूलो से
अपना तन 
जुड़े में , माला में और आभूषण में 
लगता है स्वर्ग से कोई अप्सरा 
उतरी हो धरा पर।

उपवन की सुंदरता बढ़ती 
जब खिले हो चंपा के फूल 
लगते हो जैसे धवल वस्त्र पर 
लगे हो चन्दन की टीके 
सुंदरता इसी को कहते 
बोल उठता हूँ -
प्रिये तुम चंपा का फूल हो।

संजय वर्मा "दृष्टि "
१ २ ५,बलिदानी भगत सिंह मार्ग 
मनावर जिला धार (म.प्र .)

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