बिन फेरे हम तेरे
अग्नि को साक्षी मानकर
संकल्प लेना
सुख दुःख की परिभाषा समझना
गाड़ी के दो पहिए हो
जीवन के
बिन फेरे हम तेरे
सिर्फ प्यार की पौध होते
पौधे से वृक्ष बनना
फल फूल से रिश्तों का बनना
रीति रिवाजों की खातिरदारी
ये फेरे हम तेरे से ही संभव
बिन फेरे हम तेरे
ख्वाबों की दुनिया की तरह
मौसम में बादलों की तरह होते
जो उड़ते रहते
जब तक उडाओं
ठहराव जिंदगी का
साथ फेरों के संकल्प से
होता पूर्ण|
संजय वर्मा 'दृष्टि '
मनावर (धार )
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