Swargvibha
Dr. Srimati Tara Singh
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बेटियाँ

 
बेटियाँ
बाबुल से आती चिट्ठी पढ़कर  
खुश होती/ रोती भी   
बाबुल की यादों को बाटती 
सुनाती  सखी -सहेलियों में ।

चिट्ठियों को संभाल कर रखती जाती 
बाबुल की जब आती याद 
तो पढ़ कर 
संतोष कर लेती ।

डाकिया और चिट्ठी का होता था  
हर पल इंतजार 
वो भी एक जमाना था ।

अब ये भी एक जमाना है 
जिनकी बेटियाँ है 
बस उनके ही 
बाबुल से आता है 
मोबाइल पर लिखा संदेश।




बाबुल भी क्या करे ?
बेटिया भ्रूण हत्याओ से हो गई 
दुनिया में कम 
इसलिए डाकिया /चिट्ठी और बाबुल 
हो गए है अब गुमसुम ।

भ्रूण हत्याओ को 
रोकना होगा ताकि बेटियां 
बाबुल की 
यादों को पा सके 
और पा सके 
हर बाबुल अपनी बिटियाँ का प्यार ।

संजय वर्मा "दृष्टि "
125, शहीद भगत सिंग मार्ग 
मनावर जिला -धार (म प्र )

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