वृंदावन के भागवताचार्य पंडित महेश कृष्ण उपाध्याय जी प्रसिद्ध कथावाचक द्वारा संजय वर्मा 'दृष्टि ' के काव्य संग्रह का विमोचन
काव्य संग्रह - "बेटियों का आंगन''
धार जिले के मनावर नगर में पधारे वृंदावन के भागवताचार्य पंडित महेश कृष्ण उपाध्याय जी प्रसिद्ध कथावाचक जिन्होंने कई राज्यों में अपनी कथा की है उल्लेखनीय है माननीय मुख्यमंत्री जी डॉ मोहन यादव जी के यहां भी कथा की तथा उन्हें आशीर्वाद दिया था|वर्षो पूर्व परिचित है|आप मेरे व मेरे समाज,उनकी अनुनाइयो के श्रद्धेय है | आपकी कथा वर्तमान में धार जिले के सरदारपुर में कुछ दिनों में होने वाली है| बेटियों का आँगन एवं बागेश्वर धाम का विधिवत विमोचन मेरे घर पर परिवार एवं इष्ट मित्रों की उपस्थिति में आपके पवन हाथों हुआ |सच में अगर हम ध्यान से देखें तो स्त्री ही तो प्रकृति का साक्षात् रूप होती है;दोनों ही सृजन करती हैं और दोनों के बिना ही यह धरती बंजर होने में देर नहीं लगेगी I
पुस्तक के आवरण चित्र में एक प्यारी-सी बच्ची पेड़ पर बंधे झूले में झूलती दिखाई दे रही है, जब उन्होंने काव्य संग्रह को खोला तो यही बच्ची जगह-जगह पर तमाम मोहक रूपों में दिखी और वे अभिभूत होते चले गए...|उन्होंने कहा की संजय वर्मा 'दॄष्टि " का काव्य संग्रह - "बेटियों का आंगन "में भाव पक्ष एक मजबूत पक्ष है |विभिन्न विषयों को समेटे हुए कवि ने 65 काव्य रचना के जरिये जीवन के यथार्थ को काफी गहराई से तलाशा जाकर संग्रह में तराशा है।शब्दो की जादूगरी में साहित्य परंपरा का में अपनी भावनाओं को व्यक्त किया है जो की साहित्य में बेहतर कार्य है |भाषा और भाव का पक्ष देखे तो भावपूर्ण है जिससे हिंदी के समाधान की जीत निश्चित है | आपने यह भी कहा कि कवि की सर्जन सामर्थ्य की परिपक्वता काव्य रचनाओं में स्पष्ट झलकती है|काव्य संग्रह में घरेलु हिंसा ,नारी उत्पीडन व्यवहार की दुर्दशा को बड़े ही सार्थक ढंग से प्रस्तुत किया हैबेहतरभावों भरे पहलू ह्रदय वेदना को झकझोर जाते है| संजय वर्मा "दॄष्टि " की लेखन की शैली संग्रहणीय तो है ही साथ ही स्तरीयता के मुकाम हासिल भी करती जा रही है | जो की कवि की लेखनीय परिपक्वता को प्रतिबिंबित करता है | दूसरा काव्य संग्रह का विमोचन किया |
"बागेश्वर धाम : काव्य संग्रह सनातन का मील का पत्थर "
आपने कहा कि शब्दों से धर्म की भावों की धारा " बागेश्वर धाम काव्य संग्रह :"में रचनाकार की रचनाओं का समावेश कर लेखक संजय वर्मा "दृष्टि " ने इसे रचनाकारों के लिए धर्म विषयों में काव्य रच कर साहित्य जगत को दिये जाने वाला सनातन परंपरा का विलक्षण सम्मान का प्रतीक बताया है |इसी तारतम्य में भूमिका में लेखक ने यह बात ठीक कही -पाश्चात्य संस्कृति में लिप्त होने पर हम हमारे तीज त्योहारों से दूर होते रहे है | जैसा की शीर्षक से ही पता चल रहा है कि हिंदू धर्म में कितने उत्कर्ष पर ले जाते है | हिंदू धर्म बिना हमारा जीवन अधूरा है |
"जब बागेश्वर धाम धार्मिक किताब का संस्करण रचा हो तो उसका तो कहना ही क्या ? क्योंकि सनातन.,हिंदू राष्ट्र निर्माण एवं बालाजी के शब्द भाव और अर्थ जैसे त्रिवेणी हो ।उसके द्वारा रचे काव्य सनातन भाव -विचार की परम्परा एवं संस्कृति झरने सी लगती है।
आपने माधव और माया,एवं तुलसी के बारे में वेद में लिखे प्रमाण के माध्यम से मन को छू जाने वाले उपदेश दिए | दोनों काव्यसंग्रह के विमोचन पर साहित्य उपासक द्वारा बधाई दी जाकर साहित्यिक उज्जवल भविष्य की कामना की|उल्लेखनीय कि संजय वर्मा"दृष्टि" की रचना देश विदेश की पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशित होती है।अबतक850 सम्मान से सम्मानित किया जा चुका है।इनका नाम वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकार्ड में शामिल है।गोल्डन बुक ऑफ रिकॉर्ड,स्टार बुक ऑफ रिकार्ड में भी शामिल है। 

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