बया पक्षी एवं मैना पक्षी अपनी खूबी में पारंगत
मप्र में कही- कही मैना पक्षी दिखाई देता है।छत्तीसगढ़ में मैना को प्रमुख दर्जा दिया जाकर मैना को विशिष्ट सम्मान प्राप्त है तथा इसे छत्तीसगढ़ का राजकीय पक्षी घोषित किया गया है|इनकी संख्या में कमी को देखते हुए उसे विलुप्त होने से बचाने के प्रयास जारी है।मैना की खासियत होती है कि ये इंसानो की बोली की हूबहू नक़ल उतारती है।विलुप्त प्रजातियों के पक्षियों को बचाने के प्रयास किये जाना चाहिए क्योंकि धरती पर जितना अधिकार इंसानो का है. उतना ही पशु -पक्षियों और जीव जंतुओं का भी है ।बहुत से सेवाभावी लोग गौरैया एवं अन्य पक्षियों के लिए छांव ,पानी ,दाना की व्यवस्था कर पुण्य का लाभ लेते है। कई किसान अपने खेत के कुछ हिस्सों में ज्वार ,बाजरा भी लगाते है उनका उद्देश्य दाना प्रदान करना रहता है।पक्षियों की सेवा से मन को सुकून मिलता है।दाना प्रदान करने हेतु खेतों में पक्षियों के लिए कुछ भाग सुरक्षित रखा जाता है।किंतु फलों आदि की खेती से उनके आहार पर प्रभाव पड़ा है।घोसला बनाने में निपूर्ण पक्षी की बात करें तो हर पक्षी की अपनी खासियत होती है।जिससे वो इंसानों को पसंद आते है।कई पक्षी इंजीनियरके माफिक होते है।जिसमे प्रमुख नाम बया पक्षी का है।सुंदर सा नीड वो कुएं ,कटीली झाड़ियों मे बनाकर लटकाता है।तेज आंधी,पानी से वो टूटता नही।इतनी मजबूती से बुना, चारे के द्वारा जिसमे अंदर नीचे की ओर से जाया जाता।बुनाई का अदभुत रूप ये प्राकृतिक रूप से वो तैयार करते है।ये कला की जितनी तारीफ की जाए उतनी कम ही होगी।सृष्टि का अनोखा इंजीनियर बया श्रेष्ठ पक्षी है।इसे विलुप्त होने से बचाए |
संजय वर्मा"दृष्टि"
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