Swargvibha
Dr. Srimati Tara Singh
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बाबुल का घर

 

बाबुल का घर

निहारती रहती हूँ बाबुल का घर
कितना प्यारा है मेरा बाबुल का घर
आँगन ,सखी,गलियों के सहारे बाबुल का घर
लोरी, गीत ,कहानियों से भरा बाबुल का घर |

बज रही शहनाई रो रहा था बाबुल का घर
रिश्तों के आंसू बता रहे ये था बाबुल का घर
छूटा जा रहा था जैसे मुझसे बाबुल का घर
लगने लगा जैसे मध्यांतर था बाबुल का घर |

बाबुल से जिद्दी फरमाइश करती थी बाबुल के घर
हिचकियों का संकेत अब याद दिलाता बाबुल का घर
सब आशियाने से कितना प्यारा मेरा बाबुल का घर
रित की तरह तो जाना है एक दिन, छोड़ बाबुल का घर |

संजय वर्मा "दृष्टि "मनावर (धार )

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