Swargvibha
Dr. Srimati Tara Singh
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एलियन का पृथ्वी पर आने का भ्रम कब तक

 
एलियन का पृथ्वी पर आने का भ्रम कब तक छाया रहेगा

वॉशिंगटन में एलियंस को लेकर सालों से अजीब अजीब दावे किए जाते रहे हैं।कई वैज्ञानिकों का मानना है कि ब्रह्मांड में सिर्फ पृथ्वी ही नहीं हो सकता है जहां जीवन है, बल्कि कई ऐसे ग्रह हो सकते हैं,जहां जीवन होने की संभावना है।इस बीच एक नये स्टडी रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पृथ्वी की तरफ एक अंतरिक्ष यान काफी तेज रफ्तार से बढ़ रहा है और वो विमान एलियंस का हो सकता है।एक जानकारी के मुताबिक स्टडी रिपोर्ट में कहा गया है कि नवंबर तक एलियन हमारे ग्रह तक पहुंच सकते हैं और हमला कर सकते हैं।शोधकर्ताओं ने दावा किया है कि पृथ्वी की तरफ तेज रफ्तार से बढ़ रहा ऑब्जेक्ट 3I/ATLAS (जिसे पहले A11pl3Z के रूप में जाना जाता था), वो एक एलियन विमान हो सकता है, जो हमारे ग्रह पर एक आश्चर्यजनक हमला कर सकता है। इस स्टडी रिपोर्ट को जारी करने वाले वैज्ञानिक का नाम एवी लोएब है, जो हार्वर्ड विश्वविद्यालय में खगोलविद हैं। उन्होंने एलियंस के ऊपर एक किताब भी लिखी है और वो हमेशा से दावा करते रहे हैं कि पृथ्वी पर एलियन का हमला होना निश्चित है।एलियंस की अफवाह सोशल मीडिया पर उड़ रही है कि राजस्थान के नागौर गांव में एलियन उतरे।इसकी पुष्टि नही हो पाई है।हर साल दिसंबर में नए साल के दो सप्ताह में ये अफवाहें हर साल उड़ाई जाती है।एलियंस प्रकाश के माध्यम से आना जाना करते।उनकी रफ्तार इतनी ज्यादा होती की वो आज तक धरती वासियों की पकड़ से दूर रहे है।इसलिए इनके द्धारा बनाई जाने वाली चीजों को हम आश्चर्य के रूप में देखते आए है। दुनिया मे पहली बार एलियंस के जीवाश्म प्रदर्शन की खबर पढ़ी।पेरू के कुस्को में यूएफओ मलबे में मिले थे।यह जीवाश्म डायटम(शैवाल) खदानों में पाए गए थे जिन्हें  के सेन लाजारो महल में एक हजार वर्ष कथित एलियंस के दो जीवाश्मों को पहली बार दुनिया के सामने पेश किया गया।सवाल ये उठता है कि दूसरे ग्रहों के एलियंस की बात दुनिया के सामने इतने वर्षों तक क्यों छुपाई गई |बाईट वर्षो की बात करें तो  वर्ष 2004 में पेंटागन में 144 यूएफओ एवं पिछले वर्ष ब्रिटेन में 250 से ज्यादा एलियंस देखने के मामले सामने आए| अमेरिकी संसद में यूएफओ को लेकर पहली बार खुली सुनवाई रखी गई इस सुनवाई में अमेरिका का रक्षा मुख्यालय पेंटागन अपनी क्लासिफाइड फाइलों को खोलकर ये बताएगा कि आखिर एलियंस के बारे में अभी तक उसके पास क्या जानकारी है | दुनिया भर में यूएफओ और एलियंस को लेकर चुप्पी साध रखी है | खुली सुनवाई का परिणाम कुछ दिनों में स्पष्ट होकर सामने आएगा |एलियंस की सही और तथ्यात्मक तलाश और नए ग्रहों पर जीवन की पूर्ण संभावना  खुले तौर पर स्पष्ट  होकर चंद्रयान-3 के जरिये स्पष्ट हो सकेगी।चांद पर एलियन की बस्ती जैसी हवा विक्रम लेंडर अपनी खोज से एलियन की स्थिति भी स्पष्ट कर देगा। एक जानकारी के मुताबिक विदेश का एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें UFO जैसी चीज पानी के अंदर गायब हो गई। ऐसे में शोधकर्ता भी यही मान रहे कि एलियंस का बेस पानी के नीचे है। उन्हें लग रहा है कि महासागरों की अनंत गहराइयों में उनके बेस हो सकते हैं, जिस वजह से वो हमारी पकड़ में नहीं आ रहे। वैसे भी इंसान सिर्फ 5 प्रतिशत महासागर के बारे में जानते है।अभी कुछ दिनों पूर्व नासा के वैज्ञानिकों ने अंतरिक्ष में "हम्म "की आवाज सुनी।इससे उन्होंने अंदाजा लगाया कि ये एलियन की ही आवाज हो सकती है।जो हमसे संपर्क करना चाहते हैं।आवाज पर अब शोध हो रहा है।नार्वे स्थित  मैसेजिंग एक्सट्राटेरेस्ट्रायल इंटेलिजेंस के वैज्ञानिकों ने एलियन को गत वर्ष भेजा संदेश जिसमे गणना ,अंकगणित और ज्यामिति से जुड़ी सूचनाओं के साथ घडी देखने की तकनीक के अलावा वहां  पर पानी या जीवन होने का पता लगाना भी प्रमुख है | उम्मीद  लगभग एक माह में जवाब मिल जाने की उम्मीद कर रहे थे वैज्ञानिक | एलियन के आवाज के कोड को पहचानना पृथ्वीवासियों  के लिए बहुत मुश्किल कार्य है।और इसे समझने में और हमारी भाषा उन्हें समझने में वर्षों लग जाएंगे।कई वैज्ञानिक  इन्हें तारे जी जे  273  से जो की सूर्य से 12 प्रकाश वर्ष दूर स्थित रहने का दावा करते है |एक जानकारी के मुताबिक अमेरिका की धरती पर भारतीय यंत्र बना दिखाई दिया।जिसकी लंबाई किलोमीटर में है।देश विदेश में कई आश्चर्यजनक निर्मित आकृतियां,मंदिर आदि बने हुए देखे गए।जोकि इंसानों द्धारा निर्मित नहीं हो सकते।ये बाहरी दुनिया एलियंस द्वारा निर्मित हो सकते है।शायद इन्हे निर्मित करने का उद्देश्य धरती पर पहचान स्वरूप चिन्ह अंकित करने का रहा हो | यूएफओ ,एलियंस प्रकाश के माध्यम से आना जाना करते।उनकी रफ्तार इतनी ज्यादा होती की वो आज तक धरती वासियों की पकड़ से दूर रहे है।इसलिए इनके द्धारा बनाई जाने वाली चीजों को हम आश्चर्य के रूप में देखते आए है।किंतु इन पर शोध करने की गति भी काफी धीमी है ।    किंतु इन पर शोध करने की गति भी काफी धीमी है।देखा जाए तो यूएफओ और एलियंस के वीडियो व् उसपे आधरित काल्पनिक फिल्मे कई वर्षो से देखते आरहे है |अमेरिका में एरिया 51 है जो प्रतिबंधित क्षेत्र है |वहां पर भी एलियंस ,यूएफओ के होने रहस्य बरक़रार है |समुद्र में रहस्यमयी क्षेत्र बरमुंडा त्रिकोण में एलियन  का अड्डा होने की बातें फैलाई जाती रही है |यह भी प्रश्न सोचने को मजबूर कर देता है की अमेरिका व् अन्य देशों के पास कई तरह की मिसाइल जैसे हवा से हवा  में मार करने वाली है व् अन्य सक्षम ,सशक्त टेक्नॉलॉजी मौजूद होने के बावजूद यूएफओ और एलियन  को आज तक क्यों नहीं पकड़ पाई |भारत में इनके देखे जाने की घटनाएं ज्यादा सुर्ख़ियों में नहीं आई है |पृथ्वी पर इंसानों की तरह अन्य ग्रहों पर रहवासी हो सकते है ,उनका रहन सहन ,क्या खाते होगें,उनके परिवार कैसे बनता होगा ? ये सब बातें खोजने के लिए शायद करोडो वर्ष लगेंगे उस दिशा में सभी देशों की चाल चींटी की चाल साबित हो रही है। ये सारे राज जो अब तक स्पष्ट नहीं हो सकें थे सिर्फ काल्पनिक दुनिया से देखे जा रहे थे कुछ देश एलियन के देखे जाने का दावा करते आ रहे थे|अब चंद्रयान-3 के जरिये स्पष्ट हो सकेगी।चांद पर एलियन की बस्ती है या नही। विक्रम लेंडर अपनी खोज से एलियन की स्थिति भी स्पष्ट कर देगा।एलियंस की सही और तथ्यात्मक तलाश और नए ग्रहों पर जीवन की पूर्ण संभावनाएं  खुले तौर पर स्पष्ट  हो ताकि शिक्षा के पाठ्यक्रमों से जोड़ा जाकर ज्ञानार्जन में वृद्धि हो सके| ये सारे राज जो अब तक स्पष्ट नहीं हो सकें थे सिर्फ काल्पनिक दुनिया से देखे जा रहे थे कुछ देश एलियन के देखे जाने का दावा करते आरहे थे|अब जो यान अंतरिक्ष में भेजे गए उनक जरिये स्पष्ट हो सकेगी।चांद पर एलियन की बस्ती जैसी हवा विक्रम लेंडर अपनी खोज से एलियन की स्थिति भी स्पष्ट कर देगा। 

 संजय वर्मा "दृष्टि "125 बलिदानी भगत सिंह मार्ग   मनावर जिला धार मप्र 

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