आपदा चेतावनी को नजरअंदाज न करें
कई क्षेत्रों में वर्षा का दौर जारी है।नदी नालों के उफान पर आने से कई क्षेत्रों में पुल -पुलिया पर पानी बहने लगा है।मौसम विभाग द्धारा वर्षा के आंकड़े दर्ज होने लगे है।अक्सर देखा गया कि समुद्री तटों के क्षेत्रों चक्रवात ,भारी बारिश होती आई है|मौसम विभाग भारी बारिश की चेतावनी भी देता है |वर्तमान में मौसम के बदलते स्वरुप से हैरान होना चिंतनीय है|खैर;आंधी हवा,भारी बारिश की चेतावनी को गंभीरता से लेना चाहिए |जबकि प्रशासन द्धारा चेतावनी और नियमो का पालन करने की हिदायत दी जाती है|कई लोग बारिश के मौसम में नालों में बढ़ते जलस्तर को देखने और तट पर नजदीक खड़े होकर सेल्फी लेते है | इसके अलावा अपने वाहन से पुल -पुलिया पार करने का प्रयास करते है |चेतावनी स्वरूप कई स्थानों पर संकेतक बोर्ड भी लगे है कि नदी नालों के ऊपर बने पुल पुलिया पर जब बाढ़ का स्तर ऊपर हो तो नही निकलना चाहिए।ये सावधानियां जान-माल की हानि को कम कर सकती है |पहाड़ी क्षेत्रो की बात करें तो अभी से पहाड़ो के क्षेत्रों मै आपदा से सुरक्षा के बंदोबस्त अभी से प्रारंभ कर देना चाहिये|जोशी मठ क्षेत्र में आई दरारे भविष्य में बड़ी आपदा का संकेत है।इस स्थल सावधानी बरती जाए। पहाड़ो को वर्षा पूर्व जहाँ आवश्यकता हो और भूस्खलन होने की संभावना हो वहां पर सुधार किया जाना चाहिए ताकि बादल फटने भारी वर्षा से उसकी विनाशकता को तो कम किया जाकर जान- माल कि हानि मे कमी की जा सकती है |इसके लिए सभी प्रदेशों के पहाड़ी क्षेत्रों में जहाँ सर्वाधिक वर्षा होती है।वहाँ पर अवरोधी संरचनाओ तथा अन्य कोशिशो पर ध्यान देकर वहां पर प्राकृतिक आपदाओं को सहन करने वाला क्षेत्र बनाया जाना चाहिए |ताकि प्राकृतिक आपदा के पूर्व सुरक्षा प्रबंधन से रहवासी सुरक्षित हो सके।भूस्लखन एवं बाढ़ जैसे हालात निर्मित होने पर यात्रा स्थगित स्थिति सामान्य होने के बाद अनुमति दी जाना चाहिए|
संजय वर्मा 'दृष्टि '
मनावर (धार )
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