"के है ज़िन्दगी लेने-देने का क़िस्सा,
वफ़ा मैंने की है, वफ़ा चाहता हूँ,
आदम हो तुम और आदम हूँ मैं भी,
मुहब्बत में, ज़िन्दा नफ़ा चाहता हूँ,
ज़िगर के लहू से वफ़ा लिक्खी मैंने,
लहू से लिखा, मैं सफ़ा चाहता हूँ,
जो मिट्टी है, मिट्टी में जाएगा बेशक़,
तेरा साथ मैं, हर दफ़ा चाहता हूँ।।"
(लगातार)
संजय कुमार शर्मा 'राज़'
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